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वसंत पंचमी 2027: 11 फरवरी — तारीख, सरस्वती पूजा मुहूर्त और विधि

panditraina·October 30, 2026· 1 min read
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Maa Saraswati with veena on white lotus, Vasant Panchami 2027

11 फरवरी 2027, गुरुवार — बसंत की पहली सुबह

माघ के महीने में जब सरसों के खेत पीले फूलों से लद जाते हैं और हवा में हल्की गुनगुनाहट आ जाती है, तो समझ लीजिए — वसंत पंचमी आ गई। 2027 में यह पर्व गुरुवार, 11 फरवरी को मनाया जाएगा। यह वह दिन है जब मां सरस्वती की पूजा होती है — विद्या, संगीत और कला की देवी की। जो छात्र हैं, जो कुछ नया सीख रहे हैं, उनके लिए इससे बड़ा दिन साल में कोई नहीं।

तारीख और सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार 2027 में वसंत पंचमी 11 फरवरी, गुरुवार को पड़ रही है। माघ शुक्ल पंचमी तिथि 11 फरवरी को सुबह लगभग 3:04 बजे शुरू होकर 12 फरवरी को सुबह लगभग 3:18 बजे समाप्त होगी। सरस्वती पूजा पूर्वाह्न काल में होती है — यानी सूर्योदय से मध्याह्न (दोपहर) के बीच। दिल्ली के हिसाब से पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 7:03 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक रहेगा। यह समय शहर के हिसाब से कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है — पटना में कुछ जल्दी और मुंबई में थोड़ा बाद में। इसलिए पूजा से पहले अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देख लें। 2027 के बाकी त्योहारों की तारीखें आप हमारे हिंदू कैलेंडर में भी देख सकते हैं।

क्यों मनाते हैं वसंत पंचमी

वसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्रकट हुआ था — ज्ञान की देवी, जिनके हाथ में वीणा है और जो सफेद वस्त्रों में विराजती हैं। ब्रह्मा जी ने सृष्टि तो रच दी थी, पर सब कुछ नीरव था; मान्यता है कि मां सरस्वती की वीणा के पहले स्वर ने संसार में संगीत और वाणी भर दी। इसलिए यह दिन पढ़ने-लिखने वालों, संगीतकारों, कलाकारों — यानी विद्या के हर साधक का अपना त्योहार है।

बसंत ऋतु का आगमन भी इसी दिन से माना जाता है — सर्दियों का आलस उतरता है, और नई शुरुआत की घोषणा होती है।

घर पर सरस्वती पूजा की सरल विधि

बड़ी मंदिर-जैसी तैयारी की जरूरत नहीं। घर पर पूजा ऐसे करें:

  • सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र पहनें — पीला बसंत का रंग है।
  • पूजा स्थान पर एक साफ चौकी बिछाकर मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  • मां को पीले फूल, केसर-हल्दी का तिलक, और मिश्री-केसर का भोग अर्पित करें।
  • अपनी किताबें, कॉपी, पेन और वाद्य यंत्र (अगर हैं तो) मां के चरणों के पास रखें — इस दिन इन्हें न छूने की परंपरा है।
  • धूप-दीप जलाकर बीज मंत्र का जप करें: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः — 108 बार। और देवी-देवताओं के मंत्र हमारे वैदिक मंत्र संग्रह में मिलेंगे।
  • साथ ही या कुन्देन्दुतुषारहारधवला वाला प्रसिद्ध ध्यान श्लोक पढ़ सकते हैं — यह मां सरस्वती का सबसे प्रिय स्तोत्र माना जाता है, और देवी-स्तोत्रों का पूरा संग्रह हमारे सनातन शास्त्र भंडार में है।

प्रसाद में पीली खिचड़ी, केसरी हलवा या बस मिश्री — जो मन से बने, वही स्वीकार है। घर पर पूजा-विधि की यह सरल शैली हमारे पर्व लेखों में आम है — अगर त्योहारों की क्रमबद्ध विधि पढ़ना पसंद है, तो छठ पूजा 2026 की संपूर्ण पूजा विधि भी देख सकते हैं।

अबूझ मुहूर्त और विद्यार्थियों के लिए खास परंपराएं

वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है — मान्यता है कि इस दिन पंचांग देखे बिना शुभ काम शुरू किए जा सकते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया कारोबार — बहुत से परिवार जानबूझकर यह दिन चुनते हैं। एक ईमानदार बात: कुछ पंडित फिर भी उस दिन की ग्रह स्थिति (जैसे शुक्र या गुरु का अस्त होना) देख लेते हैं, इसलिए बड़े काम के लिए अपने पंडित से सलाह जरूर लें।

बंगाल, असम, ओडिशा और बिहार में यह दिन बड़ी सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है — स्कूलों और घरों में मां की प्रतिमा बैठती है, बच्चे पीले कपड़ों में आते हैं, और खिचड़ी का भोग बंटता है। छोटे बच्चों का विद्यारंभ — पहला अक्षर लिखना — भी इसी दिन कराने की परंपरा है: सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥ — यही मंत्र पढ़कर बच्चे की कलम पकड़ाई जाती है।

अगर आप छात्र हैं और परीक्षा पास है, तो इस दिन अपनी किताबें मां के चरणों में रखकर एक संकल्प भी लें — मां सरस्वती मेहनत को ही वरदान देती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वसंत पंचमी पर शादी या गृह प्रवेश कर सकते हैं?
परंपरा के अनुसार हां — यह अबूझ मुहूर्त है। लेकिन अपने परिवार के पंडित से एक बार सलाह जरूर ले लें।

सरस्वती पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
सुबह सूर्योदय से दोपहर तक का पूर्वाह्न काल। दिल्ली में 2027 में यह लगभग 7:03 बजे से 12:36 बजे तक है।

क्या घर में छोटी-सी पूजा काफी है?
बिल्कुल। साफ मन, पीले फूल, दीप और मां का मंत्र — इतना ही पर्याप्त है। मां सरस्वती आडंबर नहीं, निष्ठा देखती हैं।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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