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मकर संक्रांति 2027: 15 जनवरी — तारीख, पुण्यकाल और दान का महत्व

panditraina·November 2, 2026· 1 min read
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मकर संक्रांति 2027: सूर्योदय पर गंगा घाट पर सूर्य अर्घ्य

2027 में मकर संक्रांति कब है — 14 जनवरी या 15?

15 जनवरी 2027 की सुबह है। प्रयाग के संगम तट पर अँधेरा अभी पूरी तरह छँटा नहीं है, लेकिन घाट पर हलचल शुरू हो चुकी है। एक बुज़ुर्ग महिला ठंडे पानी में उतरते हुए अपनी पोती का हाथ थामे कहती हैं — “बेटा, डुबकी लगा ले, आज उत्तरायण शुरू हो रहा है। देवताओं का दिन है आज!” आसपास दर्जनों लोग “गंगे मैया की जय” कहते हुए पानी में उतर जाते हैं। यही है मकर संक्रांति की असली तस्वीर।

2027 में संक्रांति का क्षण 14 जनवरी की रात लगभग 9:14 बजे (IST) पड़ेगा — यानी रात में। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे ग्रंथों का स्पष्ट नियम है: अगर संक्रांति रात में पड़े, तो अगले दिन का सूर्योदय ही मुख्य पर्वकाल माना जाता है। इसलिए 2027 में स्नान, दान और पूजा 15 जनवरी, शुक्रवार को होगी।

द्रिक पंचांग (दिल्ली) के अनुसार 15 जनवरी को महापुण्यकाल सुबह 7:15 से 9:00 बजे तक है — स्नान-दान की सबसे शुभ घड़ी। पूरा पुण्यकाल सुबह 7:15 से शाम 5:46 तक। ये समय दिल्ली के हैं — आज का पंचांग देखकर अपने शहर का समय ज़रूर जाँच लें, क्योंकि पुण्यकाल शहर के हिसाब से बदलता है।

उत्तरायण क्यों है इतना बड़ा पर्व

मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यहीं से उत्तरायण शुरू होता है — शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण के छह महीने देवताओं का दिन कहलाते हैं, और दक्षिणायन के छह महीने उनकी रात्रि।

महाभारत की कथा तो आपने सुनी ही होगी — बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म पितामह उत्तरायण की प्रतीक्षा करते रहे। मान्यता है कि वे कहते हैं — “अभी नहीं… उत्तरायण आने दो, देवताओं के दिन में देह त्यागना ही उचित है।” इसीलिए उत्तरायण काल जप, तप, दान और साधना के लिए साल का सबसे उत्तम समय माना जाता है।

एक प्यारी-सी मान्यता यह भी है कि मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं — सूर्य देव के ही पुत्र। कहा जाता है कि इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र से मिलने स्वयं पधारते हैं, इसलिए यह दिन संबंधों में मधुरता लाने वाला भी माना जाता है।

स्नान और दान: इस दिन क्या-क्या शुभ है

पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर अवतरित हुईं और कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में जा मिलीं — यह घटना मकर संक्रांति के दिन ही हुई मानी जाती है। इसीलिए गंगासागर में विशाल मेला लगता है और गंगा स्नान अक्षय पुण्य देने वाला कहा गया है। घर पर रहने वाले लोग ब्रह्म मुहूर्त में काले तिल और गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं।

इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, घी, कंबल, ऊनी वस्त्र और अनाज का दान विशेष शुभ माना जाता है। सर्दी में किसी ज़रूरतमंद को कंबल या गर्म कपड़े देना — यही तो इस पर्व की असली भावना है।

और हाँ — सूर्य उपासना का यह सबसे बड़ा दिन है। सुबह तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित कीजिए; छठ पूजा की विधि में जैसे सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है, वैसे ही मकर संक्रांति पर भी सूर्य अर्घ्य का विशेष महत्व है। छठ में सूर्य उपासना क्यों होती है, यह कथा पढ़कर आपको इस परंपरा की जड़ें और गहरी लगेंगी।

देश भर में एक ही पर्व, अलग-अलग नाम

मकर संक्रांति की खूबसूरती यही है — पूरा देश इसे मनाता है, बस नाम और अंदाज़ अलग है। गुजरात में यह उत्तरायण है, जहाँ आसमान पतंगों से भर जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी के अगले दिन माघी, और उत्तर प्रदेश-बिहार में खिचड़ी पर्व।

साल में 12 संक्रांतियाँ आती हैं, लेकिन मकर संक्रांति का दर्जा सबसे ऊँचा है — यही देवताओं के दिन की शुरुआत का ऐलान करती है। हिंदू कैलेंडर में साल भर के पर्व देखिए, और मासिक पंचांग से हर महीने की तिथि-नक्षत्र की जानकारी रखिए — त्योहार कभी अचानक नहीं आएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2027 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को?
संक्रांति का क्षण 14 जनवरी की रात ~9:14 बजे है, लेकिन शास्त्रीय नियम के अनुसार पर्व 15 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा — स्नान-दान उसी दिन करें।

पुण्यकाल में क्या करना चाहिए?
महापुण्यकाल में पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य, और तिल-गुड़, खिचड़ी, कंबल आदि का दान सबसे शुभ माना जाता है।

क्या मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को ही होती है?
आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को — यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के क्षण पर निर्भर करता है।

तो इस बार 15 जनवरी की सुबह जब आप तिल-गुड़ का एक लड्डू किसी के हाथ में रखें या ठंडी सुबह नदी में डुबकी लगाएँ — याद रखिएगा, आप सिर्फ एक त्योहार नहीं मना रहे। आप उस दिन का स्वागत कर रहे हैं, जब शास्त्रों के अनुसार देवताओं की सुबह होती है।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

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