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होली 2027: होलिका दहन 21 मार्च, रंगवाली होली 22 मार्च — शुभ मुहूर्त, भद्रा और प्रह्लाद की कथा

panditraina·November 7, 2026· 1 min read
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होलिका दहन की आग के चारों ओर परिक्रमा करते श्रद्धालु — गाँव के चौपाल पर संध्या का दृश्य

फाल्गुन की वह शाम, जब गली-गली ढोल बज उठा

तस्वीर मन में बनाइए — फाल्गुन की एक शाम। चौपाल पर लकड़ियों का ढेर लगा है, बच्चे सूखी टहनियाँ ला रहे हैं, और दादी आँगन से आवाज़ देती हैं — “अरे, होलिका के लिए गेहूँ की बालियाँ तो रख लीं?” तभी ढोलक बज उठता है और पूरा मोहल्ला जमा हो जाता है। यही होली है — बुराई पर अच्छाई की जीत की वह शाम, जो हर साल होलिका दहन से शुरू होती है।

2027 में यह शाम रविवार, 21 मार्च को है, और रंगों वाली होली अगले दिन सोमवार, 22 मार्च को मनाई जाएगी। कुछ कैलेंडर 22 मार्च भी बताते हैं, पर द्रिक पंचांग सहित अधिकांश के अनुसार होलिका दहन 21 मार्च को ही है।

होली 2027 की तारीखें

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होता है। 2027 में यह तिथि 21 मार्च की शाम 6:21 बजे शुरू होकर 22 मार्च की दोपहर 4:13 बजे तक रहेगी। रंगवाली होली, जिसे धुलंडी भी कहते हैं, 22 मार्च की सुबह से शुरू होती है — रंगों का असली खेल उसी दिन होता है। बाकी त्योहारों की तारीखें हिंदू कैलेंडर में और पूर्णिमा की तारीखें वहाँ मिल जाएँगी।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त — और भद्रा का पेच

दिल्ली में होलिका दहन का मुहूर्त 21 मार्च की शाम लगभग 6:33 से 8:55 बजे तक है — प्रदोष काल, जब पूर्णिमा तिथि लगी होती है। लेकिन 2027 में एक पेच है: पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल भी शुरू हो जाता है और पूरी शाम प्रदोष काल पर छाया रहता है।

भद्रा का सबसे अशुभ भाग, भद्रा मुख, रात लगभग 2:31 से 4:20 बजे (22 मार्च की सुबह) तक रहता है — इस समय होलिका दहन कभी नहीं करना चाहिए। बनारस परंपरा का वैकल्पिक मुहूर्त है: 22 मार्च की सुबह लगभग 5:14 से 6:23 बजे, भद्रा समाप्त होने के बाद। ये समय दिल्ली के हैं।

प्रह्लाद की कथा — आग में भी जो न जला

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के सातवें स्कंध में है। असुर राजा हिरण्यकशिपु ने तपस्या से ब्रह्मा जी से वरदान पाया था — न मनुष्य से मरेगा, न पशु से; न दिन में, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर; न अस्त्र से, न शस्त्र से। वरदान पाकर वह खुद को ही भगवान मानने लगा, लेकिन उसका छोटा बेटा प्रह्लाद भगवान श्री विष्णु जी का भक्त था। प्रह्लाद कहते हैं — “पिताजी, भगवान श्री विष्णु जी हर जगह हैं, खंभे में भी और कण-कण में भी।”

हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने के कई उपाय किए, पर हर बार प्रह्लाद बच गए। तब उसकी बहन होलिका आगे आई — कथा के अनुसार उसे आग से न जलने का वरदान था (कुछ कथाओं में अग्नि-रक्षक चादर का उल्लेख है)। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई — होलिका जलकर राख हो गई, प्रह्लाद सकुशल बाहर निकल आए। यही वह क्षण है, जिसे हर साल होलिका दहन में दोहराया जाता है: बुराई अपनी ही आग में जलती है, भक्ति बच जाती है।

इसके बाद जब हिरण्यकशिपु ने खंभा तोड़ा, तो भगवान श्री विष्णु जी भगवान नरसिंह के रूप में प्रकट हुए और संध्या के समय देहरी पर उसका वध किया। यह होली के दिन नहीं हुआ था — भगवान नरसिंह की जयंती अलग से, 2027 में मंगलवार, 18 मई को मनाई जाएगी। पूरी कथा हमारे सनातन शास्त्र पुस्तकालय में श्रीमद्भागवत पुराण में पढ़ सकते हैं।

ब्रज की होली — एक हफ़्ते का रंगोत्सव

मथुरा-वृंदावन में होली एक दिन का त्योहार नहीं, पूरे हफ़्ते का उत्सव है। 2027 की संभावित तारीखें: लड्डू होली 15 मार्च, लठमार होली बरसाना 16 और नंदगाँव 17 मार्च, फूलों वाली होली 20 मार्च, होलिका दहन 21 मार्च, रंगवाली होली 22 मार्च और हुरंगा होली 23 मार्च। ये तारीखें अपेक्षित हैं। ब्रज की होली भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है — जैसे गोवर्धन पूजा की कथा याद की जाती है, वैसे ही होली में उनकी बरसाना-नंदगाँव की लीलाएँ जी उठती हैं।

होलिका दहन की विधि और रंगवाली होली की सुबह

पूजा में जल, रोली, अक्षत, मौली, हल्दी, मूँग, बताशे, गुलाल, नारियल और गेहूँ-चने की बालियाँ रखी जाती हैं। होलिका की तीन, पाँच या सात परिक्रमा कर मौली बाँधी जाती है और नई फसल की बालियाँ आग में भूनकर प्रसाद बाँटा जाता है — मान्यता है कि यह प्रसाद साल भर स्वास्थ्य देता है। अगली सुबह होलिका की राख शरीर पर लगाई जाती है।

रंगवाली होली की सुबह गुलाल-अबीर से शुरू होती है — घरों में गुजिया बनती है और लोग पुरानी नाराज़गी भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। होली और दीपावली की लक्ष्मी पूजा में एक समानता है: दोनों अंधेरे पर उजाले की, बुराई पर अच्छाई की जीत मनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होली 2027 कब है? होलिका दहन रविवार, 21 मार्च 2027 को है और रंगवाली होली सोमवार, 22 मार्च 2027 को मनाई जाएगी।

होलिका दहन किस समय करें? दिल्ली में शाम लगभग 6:33 से 8:55 बजे का मुहूर्त है। भद्रा मुख (रात लगभग 2:31–4:20) में दहन न करें; वैकल्पिक सुबह का मुहूर्त 5:14–6:23 बजे है।

क्या भगवान नरसिंह ने होली के दिन हिरण्यकशिपु को मारा था? नहीं — होली होलिका के जलने की याद में है। भगवान नरसिंह की जयंती अलग दिन, 18 मई 2027 को मनाई जाएगी।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

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