सुबह का समय था। मंदिर के प्रांगण में अभी धूप नरम थी, और घंटों की आवाज़ के बीच एक छोटा-सा परिवार बरामदे की सीढ़ियों पर बैठा था। माँ अपने डेढ़ साल के बेटे को गोद में लिए थी — बच्चे के सिर पर पहली बार उस्तरा चलने वाला था।
नाई ने चाँदी की कटोरी में जल लिया, पीतल की थाली में चंदन और फूल सजाए गए, और दादी ने बच्चे के माथे पर तिलक लगाते हुए कहा — “डरो मत, राजा। ये बाल अब भगवान के चरणों में चढ़ेंगे, और तुम्हारी लंबी उम्र की कामना होगी।”
यही है मुंडन — शास्त्रीय भाषा में चूड़ाकरण संस्कार। जिन परिवारों में मई 2027 में बच्चे के मुंडन की योजना बन रही है, उनके लिए तारीखें, मुहूर्त और नियम — पूरी ईमानदारी के साथ — इस लेख में।
मई 2027 की 6 शुभ तारीखें
दिल्ली के पंचांग (स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिरी अयनांश) के अनुसार मई 2027 में मुंडन के लिए 6 दिन बनते हैं — इनमें से 3 शुक्ल पक्ष में हैं, जिन्हें परंपरा में ज़्यादा शुभ माना जाता है:
- 10 मई, सोमवार — शाम 6:09 से 7:01 तक; नक्षत्र: पुनर्वसु; तिथि: शुक्ल पंचमी
- 12 मई, बुधवार — दोपहर 2:05 से 2:56 तक; नक्षत्र: पुष्य; तिथि: शुक्ल सप्तमी
- 17 मई, सोमवार — शाम 4:29 से 7:05 तक; नक्षत्र: चित्रा; तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
- 21 मई, शुक्रवार — शाम 5:24 से 7:08 तक; नक्षत्र: ज्येष्ठा; तिथि: कृष्ण द्वितीया
- 27 मई, गुरुवार — शाम 5:19 से 7:11 तक; नक्षत्र: धनिष्ठा; तिथि: कृष्ण सप्तमी
- 31 मई, सोमवार — दोपहर 12:36 से शाम 7:13 तक; नक्षत्र: रेवती; तिथि: कृष्ण एकादशी
ये छहों नक्षत्र — पुनर्वसु, पुष्य, चित्रा, ज्येष्ठा, धनिष्ठा, रेवती — मुंडन के शास्त्र-सम्मत शुभ नक्षत्रों में आते हैं। मुहूर्त का समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से मिलान ज़रूर करें — हमारे मुंडन मुहूर्त टूल में आप अपने स्थान का समय देख सकते हैं, और समारोह का समय तय करते समय दिन का राहु काल भी जाँच लें।
एक ईमानदार बात: ज्येष्ठ मास और शुक्रवार का नियम
अब वही बात जो ज़्यादातर वेबसाइटें नहीं बतातीं। मई की आखिरी तीन तारीखें — 21, 27 और 31 मई — चंद्र ज्येष्ठ मास में पड़ती हैं (बुद्ध पूर्णिमा 20 मई के बाद)। परंपरा कहती है कि ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ संतान (पहली संतान) का मुंडन टाला जाता है। अगर आपका बच्चा पहली संतान है, तो 10, 12 या 17 मई ज़्यादा सुरक्षित विकल्प हैं।
और 21 मई शुक्रवार है — शुक्रवार को लड़की के मुंडन के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए बेटी के मुंडन के लिए शुक्रवार छोड़कर कोई और तारीख चुनें।
एक और सच: लोकप्रिय मुहूर्त-तालिकाओं में मई की सिर्फ़ 4 तारीखें (12, 17, 21, 27) दिखती हैं; 10 और 31 मई सिर्फ़ पंचांग-आधारित सूचियों में हैं — हमने छहों के नक्षत्र और तिथि अपने जाँच-इंजन से भी मिलाए हैं, सब सही बैठते हैं। अच्छी खबर: अप्रैल के उलट, मई में खरमास या चैत्र मास की कोई अड़चन नहीं है — मेष संक्रांति 14 अप्रैल को हो चुकी है, और मई उत्तरायण के खुले मौसम में पड़ता है।
मुंडन के पारंपरिक नियम
पीढ़ियों से चले आ रहे नियम — हर परिवार में थोड़ा फर्क हो सकता है:
- उम्र: लड़कों का मुंडन विषम वर्षों में — पहला, तीसरा, पाँचवाँ या सातवाँ साल; लड़कियों का सम वर्षों में (दूसरा, चौथा, छठा)। कुछ परिवार एक साल की उम्र में ही करा लेते हैं।
- महीना: उत्तरायण के महीने शुभ — चैत्र, वैशाख, माघ, फाल्गुन। चातुर्मास (जुलाई–नवंबर) में मुंडन टाला जाता है।
- तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी शुभ; 4, 6, 8, 9, 14 और अमावस्या-पूर्णिमा वर्जित।
- वार: सोम, बुध, गुरु, शुक्र श्रेष्ठ; मंगल और शनि वर्जित।
- नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।
- जन्म मास-नक्षत्र: कुछ परंपराओं में बच्चे के जन्म के महीने और जन्म-नक्षत्र में मुंडन की सलाह नहीं दी जाती, जबकि कुछ विद्वान जन्म-नक्षत्र के दिन को शुभ भी मानते हैं — अपने परिवार की परंपरा देखें। बच्चे का जन्म-नक्षत्र जानने के लिए राशि-नक्षत्र फाइंडर उपयोगी है।
- भद्रा और चंद्र-शुद्धि: भद्रा में मुंडन वर्जित; गोचर का चंद्रमा बच्चे के जन्म-चंद्र से चौथे, आठवें या बारहवें भाव में न हो — इसकी जाँच पारिवारिक पंडित जी करते हैं।
समारोह से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा की परंपरा है — विघ्नहर्ता से निर्विघ्न संस्कार की प्रार्थना के साथ।
मुंडन क्यों किया जाता है?
चूड़ाकरण सोलह संस्कारों में से एक है — बच्चे के पहले बालों का क्षौर। मान्यता है कि जन्म के बालों के साथ गर्भावस्था की अशुद्धियाँ भी छूट जाती हैं; यह शुद्धता और नई शुरुआत का प्रतीक है। बाल पारंपरिक रूप से मंदिर या पवित्र नदी में अर्पित किए जाते हैं — तिरुपति, हरिद्वार और वाराणसी में यह परंपरा आज भी जीवंत है।
बच्चे के कल्याण से जुड़े व्रतों की परंपरा भी है — माताएँ बच्चों की खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। और मुंडन के बाद नामकरण की चर्चा हो तो नामकरण की शुभ तारीखें और नाम के शुभ अक्षर के लिए हमारा बेबी नेम फाइंडर देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अगर सिर्फ़ एक तारीख चुननी हो तो कौन-सी?
12 मई, बुधवार — पुष्य नक्षत्र और शुक्ल सप्तमी का संयोग। पुष्य को सबसे पोषक नक्षत्र माना जाता है। 17 मई (चित्रा, शुक्ल त्रयोदशी) भी उतना ही अच्छा विकल्प है।
क्या मुंडन घर पर हो सकता है?
परंपरागत रूप से मुंडन मंदिर, तीर्थ या कुलदेवता के स्थान पर होता है, जहाँ बाल अर्पित किए जाते हैं। कई परिवार आज घर पर भी विधि कराते हैं — महत्वपूर्ण है शुद्धता, शुभ मुहूर्त और संस्कार की भावना।
क्या पहली संतान का मुंडन मई में हो सकता है?
हाँ — 10, 12 या 17 मई चुनें। 21, 27 और 31 मई चंद्र ज्येष्ठ मास में पड़ते हैं, और परंपरा ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ संतान का मुंडन टालने की सलाह देती है। अंतिम निर्णय अपने पंडित जी से पूछकर लें।
