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जन्माष्टमी 2027: तारीख, पूजा मुहूर्त और व्रत विधि

panditraina·November 8, 2026· 1 min read
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Janmashtami 2027 baby Krishna in cradle under full moon

आधी रात का वह क्षण

आधी रात का समय था। मथुरा के कारागार में सन्नाटा पसरा हुआ था। कंस के पहरेदार गहरी नींद में थे, लोहे के दरवाज़े अपने आप खुल गए थे — और उसी क्षण देवकी जी की गोद में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ। वसुदेव जी ने नवजात बालक को टोकरी में रखा और यमुना की ओर चल पड़े। कहते हैं कि नदी ने खुद रास्ता दे दिया, और शेषनाग ने अपनी फनों की छतरी से बालक को वर्षा से बचाया। भोर होते-होते बालक गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर पहुँच चुके थे।

हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की उसी आधी रात को लाखों घरों में यही क्षण फिर से जिया जाता है। मंदिरों में घंटियाँ बजती हैं, शंखनाद होता है, और झूले में विराजे बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। 2027 में इस त्योहार को लेकर एक छोटा सा उलझन है — तारीख को लेकर दो दिन बताए जा रहे हैं। इस लेख में हम वही साफ़ कर रहे हैं, ताकि आप बिना किसी दुविधा के व्रत और पूजा की तैयारी कर सकें।

2027 में जन्माष्टमी कब है — दो दिन, एक उत्सव

जन्माष्टमी 2027 को लेकर पंचांगों में दो तारीखें दिख रही हैं — मंगलवार, 24 अगस्त और बुधवार, 25 अगस्त। यह कोई गलती नहीं है; इसके पीछे तिथि और नक्षत्र का एक साफ़ कारण है। अष्टमी तिथि 24 अगस्त की रात 8:24 बजे से शुरू होकर 25 अगस्त की शाम 7:19 बजे तक रहती है, जबकि रोहिणी नक्षत्र 25 अगस्त दोपहर 12:27 बजे से 26 अगस्त सुबह 11:42 बजे तक रहता है।

स्मार्त परंपरा में निशिता काल (आधी रात) में अष्टमी के रहने को महत्व दिया जाता है, इसलिए कई पंचांग 24 अगस्त की रात का व्रत बताते हैं। वैष्णव/इस्कॉन परंपरा में अष्टमी और रोहिणी दोनों के साथ रहने को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए मंदिरों और इस्कॉन केंद्रों में उत्सव 25 अगस्त को मनाया जाता है। द्रिक पंचांग दोनों परंपराओं के लिए 25 अगस्त देता है, और सरकारी अवकाश भी 25 अगस्त को ही है।

सरल शब्दों में: 24 अगस्त की रात आधी रात का व्रत रखने वाले श्रद्धालु व्रत रखें, और 25 अगस्त को मंदिरों में जन्मोत्सव मनाएँ। दोनों ही सही हैं — अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय मंदिर के अनुसार चुनें। पूरे देश में दही हांडी अगले दिन, गुरुवार, 26 अगस्त 2027 को मनाई जाएगी।

निशिता पूजा मुहूर्त (दिल्ली)

25 अगस्त को उत्सव मनाने वालों के लिए दिल्ली में निशिता काल पूजा का मुहूर्त 26 अगस्त की रात 12:01 से 12:45 बजे तक है — आधी रात का क्षण 12:23 बजे है। चंद्रोदय 25 अगस्त की रात 11:41 बजे होगा। 24 अगस्त की रात व्रत रखने वाले उसी रात मध्यरात्रि में पूजा करें। ये समय दिल्ली के हैं; मुंबई, कोलकाता या अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग से समय जाँच लें — आज का पंचांग पर आप अपने शहर का तिथि-नक्षत्र देख सकते हैं।

घर पर जन्मोत्सव की विधि

रात 11 बजे के आसपास स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल पर बैठें। सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करें — दूध, दही, घी, शहद और मिश्री को क्रम से अर्पित करें, फिर गंगाजल से स्नान कराएँ। इसके बाद बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाएँ, मोरपंख लगाएँ और झूले में विराजित करें।

आधी रात होते ही शंख और घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाएँ। झूला धीरे-धीरे झुलाएँ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। आरती संग्रह से भगवान श्री कृष्ण की आरती गाएँ। भोग में मक्खन-मिश्री अवश्य रखें — यही बाल गोपाल को सबसे प्रिय है। साथ में धनिया पंजीरी भी अर्पित की जाती है, क्योंकि यह अनाज से रहित होती है और व्रत में ग्रहण की जा सकती है। हर भोग पर तुलसी दल रखना न भूलें।

कई परिवार छप्पन भोग भी तैयार करते हैं — 56 तरह के व्यंजनों का भोग। यह परंपरा सुंदर है, पर अनिवार्य नहीं। श्रद्धा से अर्पित एक कटोरी मक्खन-मिश्री भी उतनी ही प्रिय मानी जाती है। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा भागवत पुराण के दशम स्कंध में विस्तार से है, जिसे आप सनातन शास्त्र पुस्तकालय में पढ़ सकते हैं।

व्रत कब खोलें?

जन्माष्टमी का व्रत निर्जला या फलाहारी रखा जाता है, और इसे खोलने के तीन मान्य तरीके हैं। अधिकांश घरों में आधी रात की पूजा के बाद चरणामृत और मक्खन-मिश्री से व्रत खोल लिया जाता है। शास्त्रीय मत के अनुसार पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है — 26 अगस्त सुबह लगभग 5:56 बजे। सबसे कठोर मत के अनुसार पारण तब होता है जब रोहिणी नक्षत्र समाप्त हो — 26 अगस्त सुबह 11:42 बजे के बाद।

अपने परिवार की परंपरा के अनुसार कोई एक तरीका चुनें; तीनों ही मान्य हैं। व्रत के दिन अनाज न खाएँ, और पारण से पहले तुलसी दल सहित प्रसाद ग्रहण करें। तारीखों की पूरी सूची के लिए कृष्ण जन्माष्टमी तिथि पृष्ठ देखें।

भगवान श्री कृष्ण की लीला यहीं नहीं रुकती — कुछ ही महीनों बाद कार्तिक में गोवर्धन पूजा आती है, जब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। उस कथा और पूजा विधि के लिए हमारी गोवर्धन पूजा 2026 मार्गदर्शिका पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी 2027 किस दिन मनाएँ — 24 या 25 अगस्त?
दोनों दिन मान्य हैं। 24 अगस्त की रात स्मार्त परंपरा के अनुसार आधी रात का व्रत है; 25 अगस्त को मंदिरों और इस्कॉन में उत्सव मनाया जाता है। द्रिक पंचांग और सरकारी अवकाश 25 अगस्त देते हैं।

दही हांडी कब है?
गुरुवार, 26 अगस्त 2027 को — जन्माष्टमी के अगले दिन, नंदोत्सव के साथ।

व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, मक्खन-मिश्री और धनिया पंजीरी ली जा सकती है। अनाज पारण तक वर्जित माना जाता है।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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