सुबह का समय था। तिरुपति के पहाड़ों पर धुंध अभी छँटी नहीं थी, और मंदिर के प्रांगण में घंटे की आवाज़ गूँज रही थी। एक माँ अपने डेढ़ साल के बेटे को गोद में लिए बरामदे में बैठी थी — बच्चे की बड़ी आँखों में सुबह का उजाला था।
उसे अभी कुछ नहीं पता था कि आज उसके सिर के ये पहले बाल भगवान के चरणों में अर्पित होंगे। नाई चाँदी की कटोरी में जल लिए पास खड़ा था, और दादा फूलों की टोकरी लिए धीरे-धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे। माँ ने बेटे के माथे पर तिलक लगाया और उसके कान में कहा — “डरो मत, राजा। ये बाल अब तुम्हारी लंबी उम्र के लिए चढ़ेंगे।”
यही है मुंडन — शास्त्रीय भाषा में चूड़ाकरण संस्कार। जिन परिवारों में 2027 की शुरुआत में बच्चे के मुंडन की योजना बन रही है, उनके लिए अप्रैल की तारीखें और नियम — पूरी ईमानदारी के साथ — इस लेख में।
अप्रैल 2027 की शुभ तारीखें
2027 के लोकप्रिय मुहूर्त-प्रकाशनों (दो प्रमुख स्रोतों की सूची हूबहू एक जैसी) के अनुसार अप्रैल में मुंडन के लिए 5 दिन बताए गए हैं:
- 1 अप्रैल, गुरुवार — सुबह 9:28 से 11:28 तक; नक्षत्र: श्रवण
- 2 अप्रैल, शुक्रवार — देर रात 12:48 से रात 2:47 तक; नक्षत्र: श्रवण
- 19 अप्रैल, सोमवार — सुबह 6:10 से अगले दिन सुबह 6:03 तक; नक्षत्र: हस्त
- 22 अप्रैल, गुरुवार — तड़के 3:33 से 4:38 तक; नक्षत्र: स्वाति
- 30 अप्रैल, शुक्रवार — शाम 5:17 से 1 मई सुबह 5:52 तक; नक्षत्र: धनिष्ठा
ये चारों नक्षत्र — श्रवण, हस्त, स्वाति, धनिष्ठा — मुंडन के शास्त्र-सम्मत शुभ नक्षत्रों में आते हैं। एक बात याद रखें: मुहूर्त का समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से मिलान ज़रूर करें — हमारे मुंडन मुहूर्त टूल में आप अपने स्थान का समय देख सकते हैं, और समारोह का समय तय करते समय दिन का राहु काल भी जाँच लें।
एक ईमानदार चेतावनी: खरमास और चैत्र का सच
अब वही बात जो ज़्यादातर वेबसाइटें नहीं बतातीं। 1 और 2 अप्रैल मीन खरमास (लगभग 15 मार्च से 14 अप्रैल 2027) के भीतर पड़ते हैं — कई परंपराओं में खरमास में शुभ कार्य टाले जाते हैं। और 19, 22, 30 अप्रैल चंद्र चैत्र मास (7 अप्रैल से 6 मई) में आते हैं, जिसे मुहूर्त चिंतामणि जैसे ग्रंथ मुंडन के लिए वर्जित मानते हैं। मेष संक्रांति 14 अप्रैल को दोपहर लगभग 3:33 बजे है।
यानी शास्त्र के सख़्त पाठ के हिसाब से अप्रैल 2027 में मुंडन का कोई दिन नहीं बनता, जबकि लोकप्रिय तालिकाएँ 5 दिन देती हैं। मेरी राय? परिवार की परंपरा और अपने पंडित जी के पंचांग को ही अंतिम मानें — तालिकाएँ रास्ता दिखाती हैं, फैसला परंपरा करती है।
मुंडन के पारंपरिक नियम
पीढ़ियों से चले आ रहे नियम — इन्हें “सामान्य परंपरा” की तरह समझें, हर परिवार में थोड़ा फर्क हो सकता है:
- उम्र: लड़कों का मुंडन विषम वर्षों में — पहला, तीसरा, पाँचवाँ या सातवाँ साल; लड़कियों का सम वर्षों में (दूसरा, चौथा, छठा)।
- महीना: उत्तरायण के महीने शुभ — चैत्र, वैशाख, माघ, फाल्गुन। चातुर्मास (जुलाई–नवंबर) में मुंडन टाला जाता है।
- तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी शुभ; 4, 6, 8, 9, 14 और अमावस्या-पूर्णिमा वर्जित।
- वार: सोम, बुध, गुरु, शुक्र श्रेष्ठ; मंगल और शनि वर्जित (कुछ परिवार रविवार भी टालते हैं)।
- नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा।
- जन्म मास-नक्षत्र: बच्चे के जन्म के महीने और जन्म-नक्षत्र में मुंडन की सलाह नहीं दी जाती। बच्चे का जन्म-नक्षत्र जानने के लिए राशि-नक्षत्र फाइंडर उपयोगी है।
- भद्रा और तारा-बल: भद्रा में मुंडन वर्जित; तारा-बल की जाँच पारिवारिक पंडित जी करते हैं।
समारोह से पहले श्री गणेश जी की पूजा की परंपरा है — विघ्नहर्ता से निर्विघ्न संस्कार की प्रार्थना के साथ।
मुंडन क्यों किया जाता है?
चूड़ाकरण सोलह संस्कारों में से एक है — बच्चे के पहले बालों का क्षौर। मान्यता है कि जन्म के बालों के साथ गर्भावस्था की अशुद्धियाँ भी छूट जाती हैं; यह शुद्धता और नई शुरुआत का प्रतीक है, और बच्चे की लंबी आयु व कल्याण की कामना के साथ किया जाता है। तिरुपति जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में बाल भगवान के चरणों में अर्पित करने की परंपरा है — समर्पण और कृतज्ञता का भाव।
बच्चे के कल्याण से जुड़े व्रतों की परंपरा भी है — माताएँ बच्चों की खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी 2026 का व्रत रखती हैं। और मुंडन के बाद नामकरण की चर्चा हो तो नामकरण की शुभ तारीखें और नाम के शुभ अक्षर के लिए हमारा बेबी नेम फाइंडर देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या अप्रैल 2027 में मुंडन करना ठीक रहेगा?
लोकप्रिय तालिकाएँ 5 तारीखें देती हैं, लेकिन 1–2 अप्रैल खरमास में और 19, 22, 30 अप्रैल चंद्र चैत्र मास में पड़ते हैं — दोनों को शास्त्रीय परंपरा वर्जित मानती है। अपने परिवार की परंपरा और पंडित जी से सलाह लेकर ही निर्णय लें।
लड़की का मुंडन किस उम्र में होता है?
कई परंपराओं में लड़कियों का मुंडन सम वर्षों (दूसरा, चौथा, छठा) में होता है, लड़कों का विषम वर्षों में। यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
क्या मुंडन घर पर हो सकता है?
परंपरागत रूप से मुंडन मंदिर, तीर्थ या कुलदेवता के स्थान पर होता है, जहाँ बाल अर्पित किए जाते हैं। कई परिवार आज घर पर भी विधि कराते हैं — महत्वपूर्ण है शुद्धता, शुभ मुहूर्त और संस्कार की भावना।
