जनवरी की एक ठिठुरती सुबह थी। गाँव में चौधरी के घर नई छत डलनी थी — मज़दूर सुबह-सुबह पहुँच गए थे, सीमेंट-गारा तैयार था। तभी बुज़ुर्ग दादी आँगन में आईं और बोलीं — “अरे! आज छत मत डलवाओ। पंचक लगे हैं।”
मज़दूर रुक गए। चौधरी के बेटे ने गाँव के पंडित जी को फोन लगाया — “दादी सही कह रही हैं। 11 जनवरी की सुबह से 15 जनवरी की रात तक पंचक हैं। इन दिनों कुछ काम शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।”
पंचक क्या है, जनवरी 2027 में ये कब हैं, और इन दिनों में क्या न करें — आइए सीधी भाषा में समझते हैं।
पंचक क्या है?
चंद्रमा जब धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम 2 चरणों से लेकर शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक का सफर करता है, तो उन लगभग पाँच दिनों को पंचक कहते हैं। चंद्रमा के रेवती से निकलकर अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करते ही पंचक समाप्त हो जाते हैं।
चंद्रमा हर 27 दिनों में ये सफर पूरा करता है — यानी महीने में लगभग एक बार पंचक आते हैं, जिन्हें धनिष्ठा पंचक भी कहते हैं।
महर्षि गर्ग का नियम है — गर्ग मुनि कहते हैं कि पंचक में जो काम शुरू किया जाए, वह पाँच बार दोहराना पड़ता है। इसी मान्यता से पाँच कामों से परहेज़ की परंपरा बनी है।
जनवरी 2027 में पंचक कब हैं?
इस बार के पंचक 11 जनवरी 2027, सोमवार — सुबह लगभग 4:29 बजे से 15 जनवरी 2027, शुक्रवार — रात लगभग 11:51 बजे तक रहेंगे।
नक्षत्रों के हिसाब से सफर रहेगा: धनिष्ठा → शतभिषा → पूर्वा भाद्रपद → उत्तरा भाद्रपद → रेवती — हर दिन चंद्रमा एक नक्षत्र आगे बढ़ता है।
पंचक के समय अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है, इसलिए आज के पंचांग में पंचक की स्थिति खुद भी देख लें।
इन 5 कामों से परहेज़ करें
परंपरा के अनुसार पंचक के दौरान ये पाँच काम शुरू नहीं किए जाते:
- लंबी यात्रा, खासतौर पर दक्षिण दिशा की — दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है, इसलिए इस ओर लंबी यात्रा से बचा जाता है। ज़रूरी यात्रा हो तो हनुमान जी की पूजा या हनुमान चालीसा का पाठ करके निकलने की परंपरा है।
- छत डालना या घर का निर्माण कार्य — नई छत ढलवाना या बड़ा निर्माण शुरू करना टाला जाता है — वैसे मज़दूरों को मिठाई खिलाकर काम करवाने की परंपरा भी है।
- लकड़ी या ईंधन काटना-इकट्ठा करना — धनिष्ठा नक्षत्र से अग्नि के भय की मान्यता जुड़ी है, इसलिए लकड़ी काटने से परहेज़ किया जाता है।
- चारपाई या पलंग बनवाना — खाट बनवाना भी इन दिनों शुरू नहीं किया जाता।
- दाह संस्कार — विशेष नियम — दाह संस्कार टाला नहीं जा सकता, इसलिए इसके लिए खास व्यवस्था है: पंचक में मृत्यु होने पर योग्य पंडित के मार्गदर्शन में आटे या कुश घास की 5 पुतलियाँ बनाकर मृतक के साथ अग्नि को समर्पित की जाती हैं — इसे पंचक शांति कहते हैं। मान्यता है कि ऐसा न करने पर परिवार में अनहोनी का भय माना जाता है।
क्या-क्या चलता रहता है?
एक गलतफहमी दूर कर लें — पंचक में ज़िंदगी थम नहीं जाती। रोज़ की पूजा-पाठ, तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान चलते रहते हैं। रोज़मर्रा के काम, नौकरी-धंधा, पढ़ाई — सब सामान्य चलता है। रोक सिर्फ कुछ कामों की शुरुआत पर है।
ज़रूरी काम टालना संभव न हो, तो परंपरा में उपाय भी हैं — गायत्री मंत्र का जप या हवन, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ, और यात्रा से पहले हनुमान जी का स्मरण। वैदिक मंत्रों के बारे में यहाँ विस्तार से पढ़ें।
शादी-ब्याह जैसे बड़े संस्कारों पर परंपराओं में मतभेद है — अपने परिवार के पंडित से पूछकर ही निर्णय लें।
एक ईमानदार बात
मेरी ईमानदार राय — पंचक को अंधविश्वास कहकर उड़ा देना भी ठीक नहीं, और डर का धंधा बनाना भी नहीं। ये पूर्वजों का समय-प्रबंधन था: कुछ दिनों में कुछ काम रोककर सोच-समझकर आगे बढ़ना। डरें नहीं, जानकारी रखें।
जैसे धनतेरस के शुभ मुहूर्त में खरीदारी का विशेष महत्व है — ज्योतिष में समय का खेल ही सबसे बड़ा है। नया घर बनवा रहे हैं, तो गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त पहले से देख लें और किसी भी शुभ काम से पहले मुहूर्त हेल्पर में पंचक दोष की जाँच कर लें।
अपना जन्म नक्षत्र निकालकर देखिए — पंचक वाले नक्षत्रों में से कोई आपका जन्म नक्षत्र तो नहीं!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंचक में यात्रा बिल्कुल न करें?
लंबी, खासतौर पर दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें। ज़रूरी यात्रा हो तो हनुमान जी का स्मरण करके निकलें।
पंचक कितने दिनों के होते हैं?
लगभग पाँच दिन — चंद्रमा के धनिष्ठा से रेवती तक के सफर के बराबर, हर 27 दिनों में एक बार।
पंचक में मृत्यु हो जाए तो क्या करें?
योग्य पंडित से पंचक शांति करवाएँ — आटे या कुश घास की 5 पुतलियों के साथ दाह संस्कार की विधि पूरी की जाती है।
