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शनि अमावस्या 2027: 6 फरवरी — शनिश्चरी अमावस्या का महत्व, पूजा विधि और दान के उपाय

panditraina·November 3, 2026· 1 min read
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शनि अमावस्या 2027: तेलाभिषेक के समय शनि देव की मूर्ति, पीपल के नीचे भक्त और सरसों के दीये

शुक्रवार की शाम पौने आठ के करीब, मंदिर के चौक पर पीपल के पेड़ के नीचे एक बुजुर्ग हाथ में सरसों के तेल की छोटी बोतल लिए खड़े थे — वे पेड़ की जड़ पर तेल का पहला दीया रखते हुए मुस्कराकर कहते हैं, “कल शनि अमावस्या है। अमावस्या की रात शनि देव के नाम का दीया जलाना मत भूलना।” उनकी बात में कोई डर नहीं था, बस एक पुरानी, शांत परंपरा की खुशबू। और सच यही है — जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं, और 2027 में यह दिन शनिवार, 6 फरवरी 2027 को पड़ रहा है।

शनि अमावस्या 2027: तारीख और तिथि का हिसाब

अमावस्या जब शनिवार को पड़ती है, तो वह शनि अमावस्या कहलाती है — शनिवार शनि देव का वार है, इसलिए यह संयोग विशेष माना जाता है। 2027 की शनि अमावस्या 6 फरवरी (माघ मास) को है। अमावस्या तिथि शुक्रवार 5 फरवरी की शाम करीब 7:06 बजे शुरू होकर शनिवार 6 फरवरी की रात करीब 9:26 बजे समाप्त होगी (नई दिल्ली समयानुसार; शहर के हिसाब से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है)। सूर्योदय के समय शनिवार को अमावस्या है, इसलिए पूजा, दान और तर्पण शनिवार को ही किए जाएँगे।

उत्तर भारत में यह माघ अमावस्या है, दक्षिण में उसी तिथि को पौष अमावस्या कहते हैं। इसी दिन को मौनी अमावस्या भी कहते हैं — मौन रहकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान की परंपरा। हर मास की तारीखें अमावस्या तिथि गाइड में देखी जा सकती हैं।

शनि देव: न्याय के देवता, कर्म के न्यायाधीश

शनि देव को ज्योतिष में कर्म और न्याय का देवता माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वे सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं — रंग श्याम, वाहन कौआ, हाथ में दंड, जो अन्याय पर प्रहार करता है। मान्यता है कि शनि देव बिना वजह दंड नहीं देते; वे हमारे अपने कर्मों का फल देते हैं। इसीलिए शनि अमावस्या को शनि दोष, साढ़े साती और शनि महादशा से राहत पाने का सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है।

एक भ्रम दूर कर लें: शनि अमावस्या और शनि जयंती अलग-अलग दिन हैं। शनि जयंती शनि देव का जन्मदिन है — 2027 में शुक्रवार, 4 जून 2027 (ज्येष्ठ अमावस्या)। यानी हर शनिवार की अमावस्या शनि अमावस्या है, पर शनि जयंती साल में एक बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को आती है।

घर पर सरल पूजा विधि (शनिवार की सुबह)

पूजा में कोई कठिन नियम नहीं है — श्रद्धा और नियमितता ही सबसे बड़ा विधि-विधान है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करें। फिर:

  • पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएँ — यह इस दिन की सबसे लोकप्रिय परंपरा है। पीपल शनि देव के लिए पवित्र माना गया है।
  • शनि देव की मूर्ति या चित्र के सामने काले तिल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • मंत्र जपें — “ॐ शं शनैश्चराय नमः” — कम से कम 108 बार।
  • शनि चालीसा का पाठ या श्रवण करें — स्तोत्र व चालीसा Sanatan Shastra पुस्तकालय में मिलेंगे।
  • मंदिर में संभव हो तो शनि की काली पत्थर की मूर्ति पर तेलाभिषेक कराएँ — परंपरा के अनुसार यह शनि की कुदृष्टि को शांत करता है।
  • व्रत रखने वाले सात्विक भोजन करें — कई भक्त सूर्यास्त तक उपवास रखकर एक बार भोजन करते हैं।

व्रत-उपवास की तरह यह भी आस्था का मामला है — करवा चौथ का व्रत और छठ पूजा की तरह, यहाँ भी संयम और श्रद्धा ही मुख्य है। और इस दिन संयम का अर्थ है — मांस-मदिरा से दूर रहना, बड़ों और गरीबों से कठोर वाणी न बोलना, और छल-कपट से दूर रहना, क्योंकि शनि कर्म के न्यायाधीश हैं।

दान, पितरों का तर्पण — और सबसे बड़ा उपाय

शनि देव दान से प्रसन्न होते हैं — परंपरा के अनुसार इस दिन का दान कई गुना फल देता है। अपनी क्षमता के अनुसार इनमें से कोई एक-दो चुनें:

  • काले तिल, साबुत काले उड़द, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएँ, काला वस्त्र या कंबल — ये शनि से जुड़ी शास्त्रीय दान-सामग्री है।
  • गरीबों, वृद्धों और मजदूरों को अन्नदान करें — शनि को कर्म और श्रम का कारक माना गया है।
  • काले कुत्ते या कौओं को भोजन कराएँ — कौआ शनि देव का वाहन है।
  • जूते या छाता भी कुछ परंपराओं में दान किया जाता है।

अमावस्या तिथि स्वयं पितरों की याद का दिन है, और शनि अमावस्या पर इसका महत्व दोगुना हो जाता है। यदि आपको विधि आती है, तो तिल मिले जल से पितरों को तर्पण करें। अपने परिवार की श्राद्ध तिथि जानने के लिए श्राद्ध तिथि कैलकुलेटर उपयोगी रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: शनि अमावस्या और शनि जयंती में क्या अंतर है?
उत्तर: शनि अमावस्या हर शनिवार की अमावस्या को कहते हैं — 2027 में 6 फरवरी को। शनि जयंती शनि देव का जन्मदिवस है, ज्येष्ठ मास की अमावस्या को — 2027 में 4 जून, शुक्रवार को।

प्रश्न: क्या इस दिन व्रत रखना ज़रूरी है?
उत्तर: ज़रूरी नहीं। कई भक्त सात्विक भोजन और सूर्यास्त तक संयम रखते हैं, लेकिन पूजा, दान और मंत्र-जप ही मुख्य हैं।

प्रश्न: साढ़े साती चल रही हो तो क्या करें?
उत्तर: यह दिन साढ़े साती से राहत की प्रार्थना के लिए विशेष माना जाता है। अपनी स्थिति जानने के लिए साढ़े साती कैलकुलेटर देखें।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

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