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नामकरण मुहूर्त दिसंबर 2026: बच्चे के नामकरण की शुभ तारीखें

panditraina·October 19, 2026· 1 min read
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नामकरण मुहूर्त दिसंबर 2026 — बच्चे का नामकरण संस्कार

घर में नया मेहमान आया है — और अब सबसे प्यारा सवाल सबके मुँह पर है: बच्चे का नाम कब रखें? नामकरण सिर्फ एक रस्म नहीं, 16 संस्कारों में से पाँचवाँ संस्कार है — बच्चे को समाज में पहचान देने वाला पहला आशीर्वाद। दिसंबर 2026 में अगर आप इस शुभ काम की तैयारी कर रहे हैं, तो यहाँ तारीखों के साथ-साथ वो सच्चाई भी है जो लिस्टिंग वेबसाइटें अक्सर नहीं बतातीं — खरमास वाली।

दिसंबर 2026 की शुभ तारीखें (खरमास से पहले)

नामकरण के लिए पंडित सबसे पहले वार, तिथि और नक्षत्र देखते हैं। शुभ वार हैं सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार; मंगलवार, शनिवार और रविवार पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं। पूरे साल की सूची के लिए हमारी नामकरण मुहूर्त की तारीखों वाली गाइड भी देखें। दो स्वतंत्र पंचांग-लिस्टिंग स्रोतों के अनुसार, दिसंबर 2026 में खरमास शुरू होने से पहले ये तारीखें सबसे साफ़ हैं:

  • 3 दिसंबर, गुरुवार — हस्त नक्षत्र। वार और नक्षत्र दोनों शुभ — सबसे साफ़ तारीख।
  • 4 दिसंबर, शुक्रवार — सुबह हस्त, फिर चित्रा। शुक्रवार शुभ; कई स्रोत इसे विशेष शुभ मानते हैं।
  • 7 दिसंबर, सोमवार — शाम को अनुराधा नक्षत्र। सोमवार शुभ, लेकिन तिथि कृष्ण चतुर्दशी है — कई परंपराओं में टाली जाती है, पंडितजी से पूछें।
  • 13 दिसंबर, रविवार — श्रवण शुभ, लेकिन रविवार शुभ वारों में नहीं आता। यहाँ भी पंडितजी की राय निर्णायक रखें।

नियम याद रखें: 11वें या 12वें दिन नामकरण हो तो अलग मुहूर्त की ज़रूरत नहीं — वही दिन मुहूर्त माना जाता है। कुछ परिवारों में दसवें या सोलहवें दिन की परंपरा भी है।

खरमास वाली सच्चाई — 16 दिसंबर से

सीधी बात: धनु संक्रांति 16 दिसंबर 2026 (बुधवार) को है, और उसी दिन से खरमास शुरू — लगभग 14 जनवरी 2027 तक। उत्तर भारत की कई परंपराओं में खरमास के दौरान नामकरण जैसे संस्कार टाल दिए जाते हैं। इसलिए दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में दिखने वाली तारीखों (जैसे 17, 20, 23, 25, 30, 31 दिसंबर) पर कुछ वेबसाइटें हरी झंडी दिखाती हैं, तो कुछ परिवार उसे स्वीकार नहीं करते।

दोनों ही बातें ईमानदारी से कह रहा हूँ — तकनीकी पंचांग-परंपरा खरमास को नामकरण के लिए उतना सख़्त नहीं मानती, लेकिन लोक-परंपरा में इसका पालन गहरा है। मेरी सलाह वही है जो गृह प्रवेश वाले लेख में दी थी: खरमास के भीतर की तारीख पर अपने पारिवारिक पंडितजी की राय अंतिम रखें — और दिन का शुभ घंटा चुनना हो तो शुभ चौघड़िया ज़रूर देखें।

शुभ दिन कैसे चुनें — वार, तिथि, नक्षत्र

मुहूर्त के तीन खंभे हैं। वार: सोम, बुध, गुरु, शुक्र शुभ; मंगल, शनि, रवि से बचें। तिथि: 1, 2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, 13 शुभ मानी जाती हैं — पर द्वादशी को लेकर परंपराओं में मतभेद है, कुछ जगह टाला भी जाता है। रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14), अमावस्या, चतुर्दशी और अष्टमी से बचें। नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, पुनर्वसु और तीनों उत्तरा (फाल्गुनी, आषाढ़ा, भाद्रपद) शुभ हैं। आर्द्रा, आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल, विशाखा, भरणी, कृत्तिका टाली जाती हैं।

भद्रा और पंचांग-दोष वाले समय से भी बचें, संक्रांति या ग्रहण के दिन नामकरण न रखें, और संस्कार दिन के पहले भाग (अपराह्ण से पहले) में कराना श्रेष्ठ माना जाता है। आज का पंचांग देखकर आप तिथि-नक्षत्र की स्थिति खुद भी जाँच सकते हैं।

नाम का पहला अक्षर — नक्षत्र से चुनने की परंपरा

सबसे खूबसूरत परंपरा यह है कि बच्चे के नाम का पहला अक्षर उसके जन्म नक्षत्र के चरण (पद) के अक्षरों में से चुना जाता है — यह चंद्रमा की जन्म-समय की स्थिति पर आधारित होता है। बच्चे का जन्म नक्षत्र आप जन्म विवरण से निकाल सकते हैं, और फिर जन्म विवरण से शुभ अक्षर चुनने वाला टूल नाम सुझाने में मदद करता है।

पुरानी मान्यता: लड़के का नाम सम अक्षरों (2, 4, 6, 8) वाला, लड़की का विषम (3, 5, 7, 9) वाला; 11 अक्षरों वाला नाम दोनों के लिए सर्वश्रेष्ठ। नाम के पहले अक्षर से राशि निकालकर नाम-राशि भी जानी जा सकती है।

3 सवाल जो हर माता-पिता पूछते हैं

प्रश्न: क्या 11वें-12वें दिन अलग से मुहूर्त निकलवाना पड़ता है?
नहीं — जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण हो, तो वही दिन मुहूर्त माना जाता है।

प्रश्न: खरमास में नामकरण बिल्कुल नहीं हो सकता?
लोक-परंपरा में टाला जाता है, कुछ पंचांग-परंपराएँ छूट देती हैं। ईमानदार जवाब: अपने परिवार की परंपरा और पंडितजी की राय को तरजीह दें — 3, 4, 7 या 13 दिसंबर जैसी खरमास-पूर्व तारीखें इस दुविधा से बाहर हैं।

प्रश्न: नामकरण के बाद कौन-सा संस्कार आता है?
अन्नप्राशन, फिर मुंडन (पहला केश-मुंडन) — मुंडन मुहूर्त की तारीखें पहले से देख लें।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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