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अन्नप्राशन मुहूर्त 2027: बच्चे के पहले अन्न की शुभ तारीखें

panditraina·October 28, 2026· 1 min read
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Annaprashan ceremony: mother feeding first kheer to baby from a silver bowl, grandparents blessing

अन्नप्राशन क्या है, और यह कब होता है

अन्नप्राशन हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है — वह दिन जब बच्चा पहली बार अन्न का स्वाद चखता है। अब तक बच्चा सिर्फ दूध पर रहा होता है, और इस दिन से उसके जीवन में अन्न का प्रवेश होता है। इसीलिए इसे ‘पहला अन्न’ का संस्कार कहा जाता है, और घर में इसे किसी त्योहार से कम नहीं मनाया जाता।

परंपरा के अनुसार लड़कों का अन्नप्राशन सम (even) महीनों में — छठे, आठवें, दसवें या बारहवें महीने में — और लड़कियों का विषम (odd) महीनों में — पाँचवें, सातवें, नौवें या ग्यारहवें महीने में किया जाता है। सबसे आम चलन छठे महीने के आसपास का है, क्योंकि इसी उम्र में बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार होने लगता है। वैसे, तारीख तय करते समय डॉक्टर की राय और पंडित जी की पंचांग-गणना, दोनों को साथ रखना सबसे समझदारी भरा तरीका है।

2027 की शुभ तारीखें

नीचे दी गई तारीखें दिल्ली के पंचांग के आधार पर हैं और दो स्वतंत्र स्रोतों (गणेशास्पीक्स की मुहूर्त-सूची और स्विस एफ़ेमेरिस आधारित लाहिड़ी पंचांग-गणना) से मिलान करके चुनी गई हैं। साल के आखिरी महीनों की कई तारीखें एक तीसरे स्रोत से भी मिलती हैं। ध्यान रहे — अलग-अलग शहरों और पंचांगों में एक-आध दिन का अंतर आ सकता है, इसलिए अंतिम तारीख अपने पंडित जी से ज़रूर पक्की करवाएँ।

जनवरी से जून 2027: 15 जनवरी (शुक्रवार), 20 जनवरी (बुधवार), 8 फरवरी (सोमवार), 11 फरवरी (गुरुवार), 10 मार्च (बुधवार), 11 मार्च (गुरुवार), 17 मार्च (बुधवार), 8 अप्रैल (गुरुवार), 12 मई (बुधवार), 7 जून (सोमवार)।

जुलाई से दिसंबर 2027: 5 जुलाई (सोमवार), 12 जुलाई (सोमवार), 6 अगस्त (शुक्रवार), 3 सितंबर (शुक्रवार), 13 सितंबर (सोमवार), 1 अक्टूबर (शुक्रवार), 4 अक्टूबर (सोमवार), 8 नवंबर (सोमवार), 11 नवंबर (गुरुवार), 3 दिसंबर (शुक्रवार), 30 दिसंबर (गुरुवार)।

इन तारीखों के अलावा भी कुछ तारीखें अलग-अलग पंचांग-सूचियों में मिलती हैं, लेकिन उन पर स्रोतों में मतभेद है — इसलिए यहाँ सिर्फ वही तारीखें दी गई हैं जिन पर कम-से-कम दो स्रोत सहमत हैं। मुहूर्त का सही समय शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए वह यहाँ नहीं दिया गया है; अपने शहर का सटीक समय पंडित जी से निकलवाएँ।

मुहूर्त चुनते समय किन नियमों का ध्यान रखें

अन्नप्राशन के लिए शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता दी जाती है — चाँद बढ़ता हुआ हो, तो उसे शुभ माना जाता है — और समारोह आमतौर पर दोपहर से पहले किया जाता है। तिथियों में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी और त्रयोदशी को शुभ माना जाता है। नक्षत्रों में अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती का नाम लिया जाता है। वारों में सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को ठीक माना जाता है।

इसके अलावा दो बातें और ध्यान रखने लायक हैं। पहली — आज का पंचांग देखकर उस दिन का राहुकाल ज़रूर टालें; शुभ काम राहुकाल में शुरू नहीं किया जाता। दूसरी — बच्चे की अपनी कुंडली भी देखी जाती है, क्योंकि मुहूर्त का लग्न बच्चे के जन्म-नक्षत्र से मेल खाना चाहिए। इसीलिए सिर्फ तारीख की सूची पर भरोसा न करके, बच्चे के जन्म-विवरण के साथ किसी जानकार पंडित से लग्न निकलवाना ही सही तरीका है। जन्म-नक्षत्र कैलकुलेटर से आप बच्चे का नक्षत्र पहले से जान सकते हैं।

विधि संक्षेप में

समारोह के दिन घर को सजाया जाता है, देवी-देवताओं की पूजा होती है और फिर चाँदी की कटोरी-चम्मच से बच्चे को पहली बार खीर चटाई जाती है। चाँदी को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और खीर को देवताओं का प्रिय भोग — इसीलिए पहला अन्न मीठा ही रखा जाता है। इसके बाद परिवार के बड़े बच्चे को आशीर्वाद देते हैं।

अन्नप्राशन के बाद ही बच्चे के जीवन के अगले संस्कारों की कड़ी शुरू होती है — जैसे मुंडन और नामकरण की शुभ तारीखें भी पंचांग से ही निकाली जाती हैं। अगर नामकरण अभी बाकी है, तो बेबी नेम फ़ाइंडर से बच्चे के जन्म-नक्षत्र के अनुसार शुभ अक्षर भी जान सकते हैं। और हाँ, बच्चों के कल्याण के लिए माँएँ जो व्रत रखती हैं, उनमें अहोई अष्टमी का व्रत सबसे जाना-माना है — अन्नप्राशन की तरह ही वह भी बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना से जुड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अन्नप्राशन किस महीने में करना सबसे अच्छा है?
परंपरा के अनुसार लड़कों का छठे, आठवें, दसवें या बारहवें महीने में और लड़कियों का पाँचवें, सातवें, नौवें या ग्यारहवें महीने में। सबसे आम चलन छठे महीने के आसपास का है, लेकिन बच्चे की तैयारी और डॉक्टर की सलाह सबसे ऊपर है।

क्या अन्नप्राशन के लिए शुक्ल पक्ष ज़रूरी है?
मान्यता है कि शुक्ल पक्ष और दोपहर से पहले का समय शुभ होता है। फिर भी, बच्चे के जन्म-नक्षत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार पंडित जी ही अंतिम मुहूर्त तय करते हैं।

पहला अन्न क्या होना चाहिए?
आमतौर पर चाँदी की कटोरी में खीर चटाई जाती है — मीठा, हल्का और शुद्ध। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चे को ठोस आहार देना शुरू किया जाता है, डॉक्टर की सलाह के अनुसार।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

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