बच्चे के सिर के पहले बाल उतारने का संस्कार — मुंडन या चूड़ाकर्म — हर परिवार के लिए बड़ा दिन होता है। बहुत से माता-पिता अभी से पूछ रहे हैं कि मार्च 2027 में मुंडन की कौन-सी तारीखें शुभ रहेंगी। सीधा जवाब: सख्त शास्त्रीय नियमों पर इस महीने सिर्फ दो तारीखें खरी उतरती हैं — 10 और 11 मार्च। क्यों, इसका पूरा हिसाब नीचे है।
मार्च 2027 की मुंडन तारीखें — सख्त जाँच के बाद
10 मार्च 2027, बुधवार — रेवती नक्षत्र, शुक्ल द्वितीया से तृतीया। समय: सुबह लगभग 10:53 से शाम लगभग 6:26 तक (शहर के हिसाब से कुछ मिनट का अंतर संभव)।
11 मार्च 2027, गुरुवार — रेवती से अश्विनी नक्षत्र, शुक्ल तृतीया। सुबह से दोपहर तक का खंड; स्रोतों में समय कुछ अलग-अलग है, इसलिए शहर के पंचांग से ही पक्का करें। यह तारीख दोनों स्रोतों में एक जैसी मिलती है — सबसे सुरक्षित विकल्प।
दोनों दिन शुभ वार (बुधवार, गुरुवार) हैं और दोनों कुंभ सौर मास में हैं, यानी खरमास से पहले। हमारे मुंडन मुहूर्त कैलकुलेटर पर अपने शहर के हिसाब से भी जाँच करें; फरवरी 2027 की मुंडन तारीखों पर हमारा हिंदी लेख भी देखें।
बाकी तारीखों का क्या? — एक ईमानदार हिसाब
एक लोकप्रिय मुहूर्त सूची 5, 15, 18 और 24 मार्च भी देती है — पर सख्त मानदंडों पर ये नहीं चलतीं: 5 मार्च महाशिवरात्रि (6 मार्च) से ठीक पहले है — मेरी राय में बड़े त्योहार से ठीक पहले संस्कार न रखें। 15 मार्च मीन संक्रांति का दिन है (सुबह ~7:04 बजे सूर्य मीन में; संक्रांति के दिन शुभ कार्य वर्जित) और यहीं से खरमास शुरू। 18 मार्च होलाष्टक (16–21 मार्च) में है, जहाँ कोई मांगलिक कार्य नहीं होता। 24 मार्च खरमास (15 मार्च–14 अप्रैल) के भीतर है।
तारीखें इतनी कम क्यों?
मार्च 2027 में वर्जन एक के बाद एक जुड़े हैं: 6 मार्च (शनिवार) को महाशिवरात्रि; 8–9 मार्च के आसपास अमावस्या; 15 मार्च से खरमास (कुछ पंचांग 14 मार्च से मानते हैं — एक दिन का क्षेत्रीय अंतर); 16–21 मार्च होलाष्टक; 21 मार्च (रविवार) होलिका दहन और 22 मार्च (सोमवार) होली। इतने वर्जनों के बाद बचती हैं सिर्फ 10 और 11 मार्च।
मुंडन मुहूर्त के शास्त्रीय नियम — एक नज़र में
- नक्षत्र (12): अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती। (कुछ परंपराएँ ज्येष्ठा को बाहर रखती हैं — क्षेत्रीय अंतर।)
- तिथि: 2, 3, 5, 7, 10, 11, 13। रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14), अमावस्या और पूर्णिमा वर्जित।
- वार: सोम, बुध, गुरु, शुक्र शुभ; मंगल-शनि टालें; रविवार भी आमतौर पर नहीं।
- सौर मास: सिर्फ मकर, कुंभ, मेष, वृषभ, मिथुन — खरमास के महीनों में नहीं।
- वर्जन: भद्रा, शुक्र/गुरु अस्त, अधिक मास, संक्रांति के दिन, ग्रहण।
- चंद्र-शुद्धि: बच्चे के जन्म-चंद्र से चंद्रमा 4वें, 8वें या 12वें में न हो — पंडितजी से जाँच करवाएँ।
समय चुनते समय राहुकाल और भद्रा से बचें; दिन का पहला पहर सबसे अच्छा। मुश्किल हो तो अभिजीत मुहूर्त (रोज़ाना दोपहर के आसपास ~48 मिनट) सुरक्षित विकल्प है।
उम्र, परंपरा और क्षेत्रीय अंतर
मुंडन आमतौर पर बच्चे के विषम वर्ष में होता है — पहला, तीसरा, पाँचवाँ या सातवाँ; ज़्यादातर परिवार पहला या तीसरा चुनते हैं। एक परंपरागत मान्यता: माँ पाँच माह से अधिक गर्भवती हों तो टाल दें।
लड़कियों के शुक्रवार मुंडन पर स्रोतों में मतभेद है — एक स्रोत अशुभ बताता है, दूसरे समान नियम कहते हैं। अपने कुल की रीति और पंडितजी की राय को प्राथमिकता दें। उत्तर में अक्सर हरिद्वार-काशी जैसे तीर्थों पर होता है; दक्षिण में यही संस्कार चौल/चौलम कहलाता है। कई घरों में सिर पर छोटी शिखा छोड़ते हैं।
बच्चों के कल्याण का एक और व्रत — अहोई अष्टमी का व्रत — माताएँ संतानों के लिए रखती हैं। और मुंडन के बाद नामकरण मुहूर्त जैसे अगले संस्कार की तारीखें पहले से देख लेना समझदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मार्च 2027 में सिर्फ दो ही मुंडन तारीखें हैं?
सख्त शास्त्रीय मानदंडों पर — हाँ, 10 और 11 मार्च। अंतिम मुहूर्त हमेशा स्थानीय पंचांग से पुष्ट करें।
क्या लड़की का मुंडन शुक्रवार को हो सकता है?
स्रोतों में मतभेद है; कुल की परंपरा और पंडितजी की राय को प्राथमिकता दें।
दिन में कौन-सा समय चुनें?
सुबह का समय, राहुकाल और भद्रा से बचकर; शहर का सूर्योदय देखकर ही पक्का करें।
