मुंडन क्या है, और इसे इतनी गंभीरता से क्यों लिया जाता है
बच्चे के जन्म के बाल पहली बार उतारने का संस्कार मुंडन या चूड़ाकरण कहलाता है। यह सोलह संस्कारों में से एक है। दिन तय करते समय सबकी एक ही चिंता होती है — तारीख, नक्षत्र और कुंडली-टकराव। मान्यता है कि इससे बच्चा नई, शुद्ध शुरुआत करता है। फरवरी 2027 इस लिहाज से अच्छा महीना है: यह माघ-फाल्गुन का समय है, उत्तरायण चल रहा है, और खरमास भी बीत चुका है। एक बात पहले साफ कर दूँ — अलग-अलग पंचांग सूचियों में तारीखों को लेकर फर्क मिलता है, इसलिए नीचे दोनों प्रमुख सूचियाँ अलग-अलग दे रहा हूँ।
फरवरी 2027: मुंडन की शुभ तारीखें (पहली सूची)
नीचे दी गई पाँच तारीखें एक पंचांग सूची के अनुसार हैं। इन सभी में वार, तिथि और नक्षत्र — तीनों ही मुंडन के शास्त्रीय नियमों पर खरे उतरते हैं। समय दिल्ली के हिसाब से है; दूसरे शहरों में सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट का फर्क आ सकता है।
- सोमवार, 1 फरवरी 2027 — सुबह 8:42 से शाम 4:56 तक, ज्येष्ठा नक्षत्र, कृष्ण एकादशी।
- गुरुवार, 11 फरवरी 2027 — सुबह 7:04 से शाम 6:08 तक, रेवती नक्षत्र, शुक्ल पंचमी। यह दिन वसंत पंचमी भी है।
- गुरुवार, 18 फरवरी 2027 — दोपहर 2:29 से शाम 6:13 तक, पुनर्वसु नक्षत्र, शुक्ल त्रयोदशी।
- शुक्रवार, 19 फरवरी 2027 — सुबह 6:57 से 11:14 तक, पुष्य नक्षत्र, शुक्ल त्रयोदशी। चेतावनी के साथ: लड़की के मुंडन के लिए शुक्रवार को कई परंपराओं में टाला जाता है, इसलिए बेटी के लिए यह तारीख चुनने से पहले पंडित जी से जरूर पूछ लें।
- गुरुवार, 25 फरवरी 2027 — सुबह 6:51 से शाम 6:18 तक, चित्रा-स्वाति नक्षत्र, कृष्ण पंचमी।
अगर आप सिर्फ एक तारीख पर दाँव लगाना चाहते हैं, तो 18 फरवरी सबसे मजबूत दावेदार है — वजह अगले हिस्से में है।
दूसरी सूची अलग क्यों है — और 18 फरवरी क्यों खास है
एक दूसरी जानी-मानी सूची फरवरी 2027 के लिए ये तारीखें देती है: 8 फरवरी (शतभिषा), 13 फरवरी (अश्विनी), 16 फरवरी (मृगशिरा), 18 फरवरी (पुनर्वसु) और 24 फरवरी (चित्रा)। पहली सूची से इसमें सिर्फ 18 फरवरी ही मिलती है, और यह फर्क छिपाने लायक नहीं है।
दो बातें और गौर करने लायक हैं। पहली, 18 फरवरी को दोनों सूचियाँ दोपहर बाद का ही समय देती हैं — एक के अनुसार 2:29 से, दूसरी के अनुसार 2:31 से। दो मिनट का फर्क मतलब दोनों गणनाएँ एक ही खिड़की की ओर इशारा कर रही हैं। दूसरी, दूसरी सूची की दो तारीखें — 13 फरवरी (शनिवार) और 16 फरवरी (मंगलवार) — मुंडन के परंपरागत वार-नियम से ही टकराती हैं, क्योंकि मुंडन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शुभ माने गए हैं। इसलिए सलाह है: पहली सूची को आधार बनाएँ, 18 फरवरी को प्राथमिकता दें, और अंतिम मुहूर्त बच्चे की जन्म कुंडली और जन्म नक्षत्र देखकर पंडित जी से तय करवाएँ। कोई ऑनलाइन सूची कुंडली-टकराव की जाँच नहीं कर सकती।
मुंडन के नियम जो हर परिवार को जानने चाहिए
शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी। शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार — मंगलवार और शनिवार से बचने की सलाह है। शुभ नक्षत्र: मृगशिरा, अश्विनी, पुष्य, हस्त, पुनर्वसु, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और ज्येष्ठा।
उम्र को लेकर: आमतौर पर लड़के का मुंडन विषम वर्षों में — 1, 3, 5 या 7 साल में — और लड़की का सम वर्षों में करने की परंपरा है। पर कुल-परंपरा सबसे ऊपर है; कई परिवार पहले साल में ही कर देते हैं। क्या बचें: कुछ विद्वानों के अनुसार बच्चे के जन्म के महीने या जन्म नक्षत्र में मुंडन नहीं करना चाहिए, और जब चंद्रमा बच्चे की कुंडली में 4, 8, 12 भाव में या शत्रु राशि में हो, तब भी बचना चाहिए। दूसरे विद्वान जन्म नक्षत्र को ही शुभ मानते हैं, इसलिए यह फैसला पंडित जी से ही लें। शिखा (चोटी) छोड़ने की परंपरा भी है — नाई को पहले ही बता दें।
मुंडन विधि संक्षेप में
आमतौर पर विधि इस क्रम में होती है: पंडित जी बच्चे के नाम और गोत्र के साथ संकल्प कराते हैं, फिर गणेश पूजन और मुंडन पूजन-हवन होता है, जिसमें बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की जाती है। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पहली बार बाल उतारे जाते हैं, और उतरे बालों को पवित्र जल में प्रवाहित करने की परंपरा है। अंत में तिलक, बड़ों का आशीर्वाद और ब्राह्मणों को भोजन-वस्त्र-दक्षिणा होती है। बच्चों के कल्याण से जुड़ा एक और व्रत जानना चाहें तो अहोई अष्टमी की कथा और विधि भी पढ़ सकते हैं।
मुंडन के बाद अक्सर नामकरण की बात भी चलती है। अगर नाम अभी तय नहीं हुआ है, तो जन्म विवरण से शुभ अक्षर जानना एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। फरवरी से पहले मुंडन करना हो तो जनवरी 2027 के मुंडन मुहूर्त देखें, और तारीख को मुंडन मुहूर्त सूची से मिलाएँ।
