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रक्षाबंधन 2027: तारीख, भद्रा काल और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

panditraina·November 8, 2026· 1 min read
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Sister tying rakhi on brother wrist at home altar, Raksha Bandhan 2027

सुबह की थाली और एक धागा

सुबह का समय है। घर में हलचल शुरू हो चुकी है। बहन ने थाली सजा ली है — कुमकुम, अक्षत, एक छोटा सा दीया, मिठाई और बीच में वह लाल-पीला धागा, राखी। भाई अभी भी नींद से उठा ही है, पर उसकी कलाई आज की सबसे कीमती जगह है। माँ पीछे से कहती हैं — “जल्दी करो, शुभ समय निकल रहा है।” और बहन मुस्कुराकर कहती है — “बस, पहले टीका तो लगने दो।”

रक्षाबंधन का यही तो जादू है — एक धागा, जो भाई-बहन के रिश्ते को हर साल फिर से बाँध देता है। 2027 में यह त्योहार मंगलवार, 17 अगस्त को मनाया जाएगा। इस लेख में आपको मिलेगी पूरी जानकारी — तारीख, शुभ मुहूर्त, भद्रा का सच, पौराणिक कथाएँ और राखी बाँधने की सही विधि।

रक्षाबंधन 2027: तारीख, तिथि और शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। 2027 में पूर्णिमा तिथि सोमवार, 16 अगस्त सुबह 10:28 बजे से शुरू होकर मंगलवार, 17 अगस्त दोपहर 12:58 बजे तक रहेगी। इसलिए भारत में रक्षाबंधन मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को मनाया जाएगा।

राखी बाँधने का शुभ समय (दिल्ली) — सुबह 05:51 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक है। यह पूरा समय शुभ है, क्योंकि पूर्णिमा दोपहर 12:58 बजे समाप्त हो रही है। ध्यान रहे, यह समय दिल्ली के सूर्योदय के हिसाब से है — आपके शहर में सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। आज का पंचांग देखकर अपने शहर का सही समय जाँच लें। अमेरिका-कनाडा में रहने वाले भाई-बहन ध्यान दें — वहाँ स्थानीय तिथि के हिसाब से रक्षाबंधन सोमवार, 16 अगस्त 2027 को पड़ेगा।

2027 में भद्रा का डर नहीं — जानिए क्यों

हर साल रक्षाबंधन से पहले एक ही सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है — “भद्रा तो नहीं है?” भद्रा काल में राखी बाँधना वर्जित माना जाता है।

लेकिन 2027 में अच्छी खबर है — इस बार दिन में कोई भद्रा नहीं है। भद्रा 16 अगस्त की रात को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है। इसलिए 17 अगस्त की सुबह से दोपहर 12:58 बजे तक का पूरा समय बिना किसी रोक-टोक के राखी बाँधने के लिए शुभ है। फिर भी अगर आप अपने शहर का सटीक भद्रा समय देखना चाहते हैं, तो भद्रा काल पेज पर जाँच सकते हैं।

तीन कथाएँ, एक ही धागा

यम और यमुना की कथा: कहते हैं, धर्मराज यम अपनी जुड़वाँ बहन यमुना जी से बारह साल तक मिलने नहीं गए थे। यमुना जी दुखी हो गईं। उन्होंने गंगा जी से अपनी पीड़ा कही। गंगा जी ने यमराज को याद दिलाया। यमराज जब बहन के घर पहुँचे, तो यमुना जी ने उनका स्वागत किया, भोजन कराया और उनकी कलाई पर राखी बाँधी। यमराज इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने बहन को वरदान दिया — जो भाई बहन से राखी बँधवाएगा, वह दीर्घायु होगा।

इंद्र और इंद्राणी की कथा: भाविष्य पुराण में सबसे प्रामाणिक मानी जाने वाली कथा के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा के दिन देवराज इंद्र दानवों से युद्ध पर जाने वाले थे। उनकी पत्नी देवी इंद्राणी ने मंत्रों से सिद्ध रक्षा-सूत्र उनकी कलाई पर बाँधा। इंद्र युद्ध जीतकर लौटे। यही रक्षा-सूत्र बाद में भाई-बहन के त्योहार का रूप ले बैठा।

देवी लक्ष्मी और राजा बलि की कथा: भगवान श्री विष्णु अपने वचन के कारण राजा बलि के द्वारपाल बनकर पाताल में रहने लगे थे। देवी लक्ष्मी एक साधारण स्त्री का वेश धारण करके बलि के घर पहुँचीं और उनकी कलाई पर राखी बाँधी। बलि ने उन्हें बहन मान लिया। तब देवी लक्ष्मी ने उपहार में भगवान श्री विष्णु को माँगा — और बलि ने हँसते हुए उन्हें विदा कर दिया।

एक लोकप्रिय कथा यह भी है कि द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण की उँगली पर अपनी साड़ी का पल्लू बाँधा था, और उन्होंने रक्षा का वचन दिया था।

एक ही पूर्णिमा, देश भर में कई नाम

श्रावण पूर्णिमा सिर्फ रक्षाबंधन नहीं है — पूरे देश में इसी दिन अलग-अलग परंपराएँ मनाई जाती हैं। महाराष्ट्र और गोवा के तट पर इसे नारली पूर्णिमा कहते हैं — कोली मछुआरे समुद्र देव वरुण को नारियल अर्पित करते हैं, क्योंकि मानसून के बाद मछली पकड़ने का मौसम फिर से खुलता है।

तमिलनाडु और केरल में यह दिन अवनी अविट्टम / उपाकर्म है — ब्राह्मण इस दिन अपना यज्ञोपवीत बदलते हैं (यजुर् परंपरा में 17 अगस्त; ऋग्वेद परंपरा में तिथि एक दिन पहले भी हो सकती है)। बंगाल और वृंदावन में झूलन पूर्णिमा मनाई जाती है — राधा और भगवान श्री कृष्ण को सजे हुए झूले पर झुलाया जाता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कजरी पूर्णिमा है, जहाँ माताएँ पुत्रों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। गुजरात में शिव भक्त पवित्रोपना मनाते हैं। एक ही चाँद, एक ही पूर्णिमा — और हर प्रांत में अपनी-अपनी खुशी। पूर्णिमा की तारीखों की पूरी सूची यहाँ देख सकते हैं।

राखी बाँधने की सही विधि

विधि बहुत सरल है, पर कुछ बातों का ध्यान रखना अच्छा रहता है। सबसे पहले बहन भाई के माथे पर कुमकुम-चंदन का टीका लगाए, फिर अक्षत छिड़के। दाहिनी कलाई पर राखी बाँधते समय यह मंत्र बोला जाता है — “येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” यह मंत्र भाविष्योत्तर पुराण में आया है। मंत्रों का संग्रह वैदिक मंत्र संग्रह में भी मिल जाएगा।

राखी बाँधने के बाद भाई की आरती उतारें, मिठाई खिलाएँ। त्योहार का असली मतलब धागे में नहीं, वादे में है — कि भाई हर मुश्किल में बहन के साथ खड़ा रहेगा। भाई-बहन के इसी रिश्ते का दूसरा त्योहार है भाई दूज 2026 — वहाँ तिलक की परंपरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रक्षाबंधन 2027 कब है?
भारत में मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को। दिल्ली में राखी बाँधने का शुभ समय सुबह 05:51 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक है।

2027 में भद्रा कब है?
2027 में रक्षाबंधन के दिन कोई भद्रा नहीं है — भद्रा 16 अगस्त की रात को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?
यह भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के वादे का त्योहार है। इसकी जड़ें भाविष्य पुराण की कथाओं और श्रावण पूर्णिमा की परंपरा से जुड़ी हैं, जिसका उल्लेख सनातन शास्त्र ग्रंथालय की पुस्तकों में भी मिलता है।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
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