तस्वीर मन में बनाइए — मई की एक सुबह, सूरज अभी छतों के ऊपर चढ़ा ही है। एक नए घर की चौखट पर आम के पत्तों की तोरण झूल रही है। गृहस्वामी के हाथ में पीतल का कलश है। पंडित जी मुस्कुराकर कहते हैं — “बस, अब दायां पैर अंदर रखिएगा। यही पल है, जब मकान ‘घर’ बनता है।”
मई 2027 में नए घर में प्रवेश की सोच रहे हैं? अच्छी खबर है — अप्रैल की एकलौती तारीख़ के बाद मई में गृह प्रवेश के आठ शुभ दिन हैं। खरमास बीत चुका है, शुक्र अस्त भी जुलाई से पहले नहीं है।
मई 2027 की आठ शुभ तारीख़ें — पूरी सूची
सभी तारीख़ें दिल्ली की पंचांग गणना पर आधारित हैं और कई स्वतंत्र स्रोतों से जाँची गई हैं।
- शुक्रवार, 7 मई — रोहिणी, शुक्ल द्वितीया-तृतीया। रात 11:42 बजे से 8 मई सुबह 5:35 बजे तक।
- शनिवार, 8 मई — रोहिणी-मृगशिरा, शुक्ल द्वितीया-तृतीया। सुबह 5:35 बजे से 9 मई सुबह 5:35 बजे तक।
- शनिवार, 15 मई — उत्तराफाल्गुनी, शुक्ल दशमी-एकादशी। दोपहर 12:00 बजे से 16 मई सुबह 5:30 बजे तक।
- सोमवार, 17 मई — चित्रा, शुक्ल त्रयोदशी। शाम 4:28 बजे से 18 मई सुबह 5:29 बजे तक।
- गुरुवार, 20 मई — अनुराधा, कृष्ण प्रतिपदा। शाम 4:28 बजे से 21 मई सुबह 5:27 बजे तक।
- शुक्रवार, 21 मई — अनुराधा, कृष्ण प्रतिपदा। सुबह 5:27 बजे से दोपहर 2:51 बजे तक।
- सोमवार, 24 मई — उत्तराषाढ़ा, कृष्ण पंचमी। रात 10:58 बजे से 25 मई सुबह 5:26 बजे तक।
- सोमवार, 31 मई — उत्तराभाद्रपद से रेवती, कृष्ण दशमी-एकादशी। सुबह 5:24 बजे से 1 जून सुबह 5:24 बजे तक।
9 मई, रविवार को अक्षय तृतीया है। यह दिन खरीदारी और नए कामों के लिए अत्यंत शुभ है, पर गृह प्रवेश की प्रकाशित मुहूर्त-सूचियों में यह तारीख़ नहीं है — प्रवेश के लिए ऊपर की सूची ही चुनिए। तुलना के लिए हमारी जनवरी 2027 की गृह प्रवेश तारीख़ें और अप्रैल 2027 की गृह प्रवेश तारीख़ें भी देख सकते हैं।
शनिवार वाली दो तारीख़ों पर एक ईमानदार बात
8 और 15 मई शनिवार हैं, और परंपरागत नियम में मंगलवार व शनिवार गृह प्रवेश के लिए टाले जाते हैं — तो क्या ये दोनों तारीख़ें गलत हैं? नहीं। 7 मई का मुहूर्त शुक्रवार रात 11:42 बजे से शुरू होकर शनिवार सुबह तक चलता है, इसलिए 8 मई का मुहूर्त उसी रात का विस्तार है। 15 मई भी सभी प्रमुख पंचांग-सूचियों में शुभ है — सख्त गणना वाले स्रोत भी इसे रखते हैं। शनिवार का सख्त पालन करने वाले परिवार 17, 20, 21, 24 और 31 मई चुन सकते हैं। मुहूर्त की पुष्टि गृह प्रवेश तारीख़ उपकरण से कर लीजिए।
तारीख़ चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें
वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार सर्वोत्तम; मंगलवार और शनिवार टाले जाते हैं। तिथि: शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता; रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या वर्जित हैं — मई की किसी भी सूचीबद्ध तारीख़ में ये नहीं पड़तीं। नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद और रेवती गृह प्रवेश के शास्त्रसम्मत नक्षत्र हैं — मई की आठों तारीख़ें इन्हीं में से किसी नक्षत्र में पड़ती हैं।
मई की एक और राहत — खरमास खत्म हो चुका है। मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2027 को हुई, उसी के साथ मीन खरमास समाप्त हुआ। शुक्र अस्त भी मई में नहीं है — वह 21 जुलाई से 9 सितंबर 2027 तक पड़ता है। चातुर्मास जुलाई के मध्य से शुरू होता है, इसलिए जुलाई के बाद अक्टूबर तक के महीने गृह प्रवेश के लिए प्रायः वर्जित माने जाते हैं। आपके शहर में सूर्योदय के अंतर से मुहूर्त 20–45 मिनट आगे-पीछे हो सकता है — प्रवेश से पहले अपने शहर का पंचांग देख लीजिए। वास्तु के लिए वास्तु शास्त्र की संपूर्ण मार्गदर्शिका और गृह प्रवेश वास्तु की मूल बातें पढ़ लीजिए।
प्रवेश की विधि — कलश, दायां पैर और दूध उबालना
तारीख़ तय हो जाए, तो विधि का क्रम याद रखिए — भगवान श्री गणेश की पूजा सबसे पहले होती है, फिर नवग्रह शांति और वास्तु शांति, उसके बाद हवन। गृहस्वामी या गृहस्वामिनी कलश लेकर दायां पैर पहले चौखट के अंदर रखें। नए बर्तन में दूध तब तक उबालें जब तक वह उफन न आए — उफनता दूध घर में समृद्धि के उमड़ने का प्रतीक है। और एक ईमानदार राय — मुहूर्त मन को शांत करता है, पर अगर घर का काम अधूरा है या बिजली-पानी बाकी है, तो एक हफ़्ता रुक जाना जल्दबाज़ी में प्रवेश करने से हमेशा बेहतर है। नए घर का पहला त्योहार — दीपावली की लक्ष्मी पूजा — भी उसी उत्साह से मनाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मई 2027 में गृह प्रवेश के कितने शुभ दिन हैं?
आठ — 7, 8, 15, 17, 20, 21, 24 और 31 मई।
2. क्या अक्षय तृतीया (9 मई) को गृह प्रवेश कर सकते हैं?
अक्षय तृतीया खरीदारी और नए कामों के लिए अत्यंत शुभ है, पर गृह प्रवेश की मुहूर्त-सूचियों में यह तारीख़ नहीं है — सूची की आठ तारीख़ों में से चुनिए।
3. हमारे शहर का मुहूर्त दिल्ली से कितना अलग होगा?
सूर्योदय के अंतर से 20–45 मिनट तक। अंतिम समय अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पंडित से पुष्ट कर लीजिए।
