रात के बारह बजने वाले हैं। मंदिर के गर्भगृह में दीपक की लौ धीरे-धीरे झूल रही है, और एक भक्त हाथ में बेलपत्रों की टोकरी लिए शिवलिंग के सामने खड़ा है। बाहर आधा चाँद निकला है, हवा में बेलपत्र और चंदन की खुशबू घुली हुई है। पंडित जी धीरे से कहते हैं — “बस, अब निशीथ काल आ गया।”
यह रात हर महीने आती है — मासिक शिवरात्रि।
मासिक शिवरात्रि क्या है
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की रात मानी जाती है, इसीलिए इसे शिव-शक्ति के संगम का पर्व कहा जाता है। जो भक्त यह व्रत साल भर निभाना चाहते हैं, वे इसे महाशिवरात्रि से शुरू करते हैं। एक बात पहले साफ कर लें — 2027 में यह व्रत 12 नहीं, 13 बार पड़ेगा; जुलाई में दो बार (2 जुलाई और 31 जुलाई)। चंद्रमास तो 12 ही होते हैं, पर अंग्रेज़ी कैलेंडर के साल में कभी-कभी 13 चतुर्दशी आ जाती हैं।
2027 की 13 तारीखें — पूरी सूची
तारीखें नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं। कुछ पंचांग सूर्योदय-नियम से अगले दिन की तिथि देते हैं — तिथि वही है, नियम अलग है। आज की तिथि के लिए आज का पंचांग देखें, और मासिक शिवरात्रि की तारीखों की सूची पर हर महीने की तारीख पहले से देख सकते हैं।
- 5 जनवरी, मंगलवार — पौष कृष्ण चतुर्दशी
- 4 फरवरी, गुरुवार — माघ कृष्ण चतुर्दशी
- 6 मार्च, शनिवार — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि)
- 5 अप्रैल, सोमवार — चैत्र कृष्ण चतुर्दशी
- 4 मई, मंगलवार — वैशाख कृष्ण चतुर्दशी
- 3 जून, गुरुवार — ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी
- 2 जुलाई, शुक्रवार — आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी
- 31 जुलाई, शनिवार — श्रावण कृष्ण चतुर्दशी (सावन शिवरात्रि)
- 30 अगस्त, सोमवार — भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी
- 28 सितंबर, मंगलवार — आश्विन कृष्ण चतुर्दशी
- 27 अक्टूबर, बुधवार — कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
- 26 नवंबर, शुक्रवार — मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी
- 25 दिसंबर, शनिवार — पौष कृष्ण चतुर्दशी
दो तारीखें खास हैं — 6 मार्च महाशिवरात्रि और 31 जुलाई सावन शिवरात्रि। मंगलवार को पड़ने वाली शिवरात्रि (5 जनवरी, 4 मई, 28 सितंबर) को पंचांग में विशेष शुभ माना गया है। अक्टूबर की शिवरात्रि (27 अक्टूबर) की चतुर्दशी वही है जो नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली कहलाती है — एक ही तिथि, दो पर्व।
महाशिवरात्रि से क्या अंतर है
महाशिवरात्रि साल में एक बार आती है — 2027 में शनिवार, 6 मार्च को, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर। एक बात साफ कर दें — कई जगह गलती से 15 फरवरी 2027 लिखा मिलता है; वह 2026 की तिथि थी, 2027 की नहीं। कथा के अनुसार इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, और आधी रात को भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
समुद्र मंथन की कथा भी इसी रात से जुड़ी है — हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने उसे गले में रोक लिया और उनका गला नीला पड़ गया, तभी से वे नीलकंठ कहलाए। इसीलिए रात भर जल और दूध से अभिषेक की परंपरा है। मासिक शिवरात्रि उसी व्रत का मासिक रूप है — छोटी, सरल और हर महीने निभाई जा सकने वाली।
पूजा विधि — रात की पूजा कैसे करें
मुख्य पूजा रात में निशीथ काल में होती है — आधी रात के आसपास लगभग 48 मिनट का समय। जो भक्त पूरी रात जागते हैं, वे चार प्रहर की पूजा करते हैं — हर प्रहर में अलग अभिषेक: पहले प्रहर जल, दूसरे दही, तीसरे घी और चौथे शहद। साथ में “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप किया जाता है। सनातन शास्त्र ग्रंथालय में महामृत्युंजय मंत्र और रुद्रम् जैसे स्तोत्र भी मिलेंगे, जो इस रात पढ़े जाते हैं।
चढ़ावे में बेलपत्र सबसे पहले आते हैं — 108 बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है, बिना कटे-फटे, तीन पत्तों वाले। इसके साथ कच्चा दूध, गंगाजल, पंचामृत, सफेद फूल और चंदन चढ़ाए जाते हैं; परंपरा के अनुसार धतूरा और भांग भी अर्पित किए जाते हैं।
व्रत सामर्थ्य के अनुसार रखें — निर्जला या फलाहार, अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के हिसाब से। उस दिन अन्न नहीं खाते; वृद्ध, रोगी और गर्भवती महिलाएँ सरल व्रत रखें। पारण अगली सुबह सूर्योदय के बाद किया जाता है; महाशिवरात्रि का पारण 7 मार्च को सुबह लगभग 6:40 से दोपहर 1:46 तक है। शिव से जुड़ा एक और मासिक व्रत त्रयोदशी का प्रदोष है — प्रदोष व्रत की तारीखें भी देख लें।
व्रत कथा — शिकारी और बेलपत्र
कथा के अनुसार एक शिकारी बाघ से बचकर बेल के पेड़ पर चढ़ गया। डर के मारे वह रात भर जागता रहा, और अनजाने में बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे गिराता रहा — उसे पता ही नहीं था कि पेड़ के नीचे शिवलिंग है। सुबह हुई तो भगवान शिव उस पर प्रसन्न हुए। कहते हैं, अनजाने में हुई वह पूजा भी खाली नहीं गई — सच्चे मन से किया गया छोटा-सा प्रयास भी भगवान शिव के यहाँ गिना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मासिक शिवरात्रि हर महीने किस तिथि को पड़ती है?
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को। 2027 में यह 13 बार पड़ेगी, जिनमें 6 मार्च की महाशिवरात्रि और 31 जुलाई की सावन शिवरात्रि शामिल हैं।
क्या निर्जला व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। निर्जला या फलाहार — अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार चुनें। अन्न न खाना ही व्रत का मुख्य नियम माना जाता है।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि में क्या अंतर है?
महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आती है (2027 में 6 मार्च); मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है।
और हाँ — अगर आप इस समय दीपावली की तैयारी कर रहे हैं, तो दीपावली 2026 की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त और विधि भी देख लें। मासिक शिवरात्रि का व्रत छोटा है, पर नियमितता ही इसकी असली ताकत है।
