घर में नन्हा मेहमान आया है, और अब सबसे प्यारा सवाल सबके मुँह पर है — बच्चे का नाम कब रखें? अच्छी खबर यह है कि फरवरी 2027 में इस शुभ काम के लिए कोई लंबा रुकावट वाला दौर नहीं है। खरमास 16 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक था, और अगला खरमास मार्च के मध्य से शुरू होगा — इसलिए पूरा फरवरी नामकरण के लिए खुला है। एक बात पहले साफ़ कर दूँ: अलग-अलग पंचांग-सूचियाँ अलग छँटनी से तारीखें देती हैं, इसलिए नीचे दो सूचियाँ अलग-अलग हैं — मिलाकर एक सूची नहीं बनाई गई है।
सबसे पक्की तारीख: 19 फरवरी, शुक्रवार
एक तारीख ऐसी है जिस पर दोनों तरह की सूचियाँ पूरी तरह सहमत हैं — 19 फरवरी, शुक्रवार, पुष्य नक्षत्र, शुक्ल त्रयोदशी। दिल्ली के हिसाब से संकुचित मुहूर्त सुबह 06:57 से 11:14 तक है; दूसरी सूची इससे चौड़ा समय देती है, पर नक्षत्र और तिथि वही है। अगर आप सिर्फ एक तारीख पर भरोसा करना चाहते हैं, तो यही सबसे साफ़ विकल्प है। पूरे साल की नामकरण तारीखों की गाइड में भी पुष्य और शुक्रवार का यही मेल दिखता है।
दूसरी मज़बूत तारीख है 11 फरवरी, गुरुवार — वसंत पंचमी का दिन। इस दिन शुक्ल पंचमी और रेवती नक्षत्र है, और दिन के समय नक्षत्र रेवती ही रहता है। सरस्वती पूजा के दिन बच्चे का नाम रखना कई परिवारों के लिए भावनात्मक रूप से भी खास होता है।
पहली सूची की बाकी तारीखें (दिल्ली, संकुचित मुहूर्त)
पहली सूची, जो कड़े नियमों से छाँटकर तारीखें देती है, फरवरी में ये तीन तारीखें और बताती है:
- 18 फरवरी, गुरुवार — पुनर्वसु नक्षत्र, सुबह 06:58 से शाम 06:13 तक।
- 22 फरवरी, सोमवार — उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र, सुबह 11:56 से शाम 06:16 तक।
- 25 फरवरी, गुरुवार — चित्रा-स्वाति नक्षत्र, सुबह 06:51 से शाम 06:18 तक।
इन तीनों में वार और नक्षत्र दोनों शुभ हैं, इसलिए जो परिवार कड़ी छँटनी वाली सूची मानते हैं, उनके लिए यही तारीखें काम की हैं।
दूसरी सूची के मुहूर्त-खंड (विंडो वाली सूची)
दूसरी तरह की सूचियाँ मुहूर्त-खंड (विंडो) देती हैं — इनके अनुसार: 4 फरवरी (गुरुवार) दोपहर से 6 फरवरी सुबह तक — उत्तराषाढ़ा; 7 फरवरी (रविवार) — धनिष्ठा; 10 फरवरी (बुधवार) से 13 फरवरी तक — उत्तर भाद्रपद; 15 फरवरी (सोमवार) से 16 फरवरी सुबह तक — रोहिणी; 24 फरवरी (बुधवार) सुबह — हस्त; 28 फरवरी (रविवार) — अनुराधा।
यहाँ ईमानदार चेतावनी ज़रूरी है: इनमें रविवार के खंड भी हैं, और 15 फरवरी नवमी तिथि पड़ती है — कड़ी परंपरा वाले परिवार रविवार और रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) से बचते हैं। इसलिए इन खंडों पर फैसला अपने पारिवारिक पंडितजी से पूछकर ही करें। जिस दिन संक्रांति पड़े, उस दिन भी नामकरण टाल दिया जाता है। शुभ घंटा चुनना हो तो आज का पंचांग देखें।
नामकरण के बुनियादी नियम — जो हर तारीख पर लागू हैं
परंपरा के अनुसार नामकरण जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है — और उस दिन अलग से मुहूर्त निकलवाने की ज़रूरत नहीं मानी जाती, वही दिन मुहूर्त होता है। कुछ परिवारों में 10वें, 16वें या 21वें दिन की परंपरा भी है। संस्कार सूतक के 10 दिन पूरे होने के बाद और दिन के पहले भाग में कराना श्रेष्ठ माना जाता है। शुभ वार हैं सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार; शुभ नक्षत्रों में अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती और तीनों उत्तरा आते हैं।
बच्चों से जुड़े व्रतों के लिए हमारा अहोई अष्टमी 2026 लेख भी देखें।
नाम का पहला अक्षर — जन्म नक्षत्र के चरण से
सबसे खूबसूरत परंपरा यह है कि बच्चे के नाम का पहला अक्षर उसके जन्म नक्षत्र के चरण (पद) के अक्षरों में से चुना जाता है। हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर चरण का अपना अक्षर। मिसाल के तौर पर, रोहिणी नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए ओ, व, वि या वु अक्षर आते हैं — जैसे विहान या वन्या। बच्चे का जन्म नक्षत्र जन्म विवरण से निकालें, फिर जन्म विवरण से शुभ अक्षर चुनने वाला टूल नाम सुझाने में मदद करता है। पुरानी परंपरा में दो नाम रखे जाते थे — एक सबके सामने पुकारने वाला, एक गुप्त नक्षत्र-नाम।
3 सवाल जो हर माता-पिता पूछते हैं
प्रश्न: क्या 11वें-12वें दिन अलग से मुहूर्त निकलवाना पड़ता है?
नहीं — जन्म के 11वें या 12वें दिन नामकरण हो, तो वही दिन मुहूर्त माना जाता है।
प्रश्न: फरवरी में खरमास तो नहीं है?
नहीं — पिछला खरमास 14 जनवरी को खत्म हो चुका है और अगला मार्च के मध्य से है। पूरा फरवरी इस लिहाज़ से खुला है।
प्रश्न: नामकरण के बाद कौन-सा संस्कार आता है?
अन्नप्राशन, फिर मुंडन (पहला केश-मुंडन) — मुंडन मुहूर्त की तारीखें पहले से देख लें।
