दिसंबर 2026 का आखिरी पखवाड़ा काम के नजरिए से खास होने वाला है — 14 दिसंबर की रात से 19 दिसंबर की दोपहर तक पंचक लग रहा है। अगर घर की नई छत डलनी है, चारपाई या बेड खरीदना है, या दक्षिण दिशा की लंबी यात्रा का प्लान है, तो ये तारीखें ध्यान से देख लीजिए। पंचक पर डरने की जरूरत नहीं, पर नियम जानना समझदारी है।
पंचक है क्या?
जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से लेकर रेवती नक्षत्र तक का सफर करता है, उस करीब 5 दिन के समय को पंचक कहते हैं। इसमें ये 5 नक्षत्र आते हैं — धनिष्ठा (तीसरे चरण से), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती — जो कुंभ और मीन राशि में फैले हैं। आप अपनी जन्म कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र जानना चाहते हैं तो जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर से देख सकते हैं।
दिसंबर 2026: तारीखें और समय
सोमवार, 14 दिसंबर रात 10:35 बजे से शनिवार, 19 दिसंबर दोपहर 3:58 बजे तक (भारतीय समय, दिल्ली के अनुसार) पंचक रहेगा। ये समय देश के बड़े पंचांगों में एक जैसा दर्ज है — दिल्ली और अहमदाबाद जैसे शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पक्का कर लें। महीने के पंचांग में बाकी योग-करणों के साथ पंचक की तारीखें भी देखें: मासिक पंचांग।
चूंकि ये सोमवार को शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जा रहा है।
पंचक के 5 प्रकार — शुरुआत के वार से
पंचक किस वार को शुरू होता है, इसके हिसाब से उसके पांच नाम प्रचलित हैं:
- रविवार — रोग पंचक
- सोमवार — राज पंचक
- मंगलवार — अग्नि पंचक
- शुक्रवार — चोर पंचक
- शनिवार — मृत्यु पंचक
बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक को अधिकतर परंपराओं में दोष-रहित, यानी शुभ माना जाता है। एक बात ईमानदारी से बता दूं — कुछ पंचांग बुधवार को राज पंचक और गुरुवार को अग्नि पंचक में गिनते हैं; ये इलाकाई फर्क है। राज पंचक के बारे में भी दो राय हैं: लोकमान्यता कहती है कि सोमवार वाला पंचक अपेक्षाकृत शुभ है — सरकारी कामों में सफलता और संपत्ति के काम अनुकूल। वहीं कुछ आधुनिक पंचांग चेतावनी देते हैं कि “राज” सिर्फ नाम है, अलग नियम नहीं। दोनों राय सामने हैं; अंधविश्वास नहीं, समझदारी रखें।
पंचक में किन कामों से बचना चाहिए?
पांच काम पंचक में वर्जित माने गए हैं:
- अंतिम संस्कार — बिना उपाय के पंचक में शवदाह वर्जित है।
- चारपाई या बेड बनाना/खरीदना — खासकर शतभिषा के दिन।
- लकड़ी, घास या ईंधन का भंडार — धनिष्ठा के दिन अग्नि भय जुड़ा है।
- नए घर पर छत डालना — रेवती के दिन नुकसान या कलह का डर माना जाता है।
- दक्षिण दिशा की यात्रा — दक्षिण यम की दिशा मानी जाती है।
नया निर्माण शुरू करना भी टालने की सलाह है। विवाह जैसे बड़े संस्कार भी पंचक में टालने की परंपरा है — हालांकि खरीदारी की रोकथाम से जुड़ी एक और सूची हमारी धनतेरस पर क्या खरीदें-क्या न खरीदें वाली गाइड में भी मिलेगी। ध्यान रहे, गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथियों की पूरी सूची हमने जनवरी 2027 के गृह प्रवेश मुहूर्त में दी है — पंचक के दिनों को उसमें से भी बाहर रखें।
काम जरूरी हो तो क्या उपाय करें?
कई बार काम टलता नहीं। परंपरा ने हर वर्जन के साथ उसका उपाय भी बताया है:
- अंतिम संस्कार अपरिहार्य हो तो कुशा या आटे के 5 पुतले बनाकर साथ जलाए जाते हैं — ये विधि गरुड़ पुराण में दर्ज है। (हमारे सनातन शास्त्र पुस्तकालय में ऐसे प्राचीन ग्रंथों का संग्रह है।)
- लकड़ी खरीदनी ही हो तो गायत्री हवन करके लाएं।
- दक्षिण यात्रा टाली न जा सके तो हनुमान मंदिर में 5 फल अर्पित करें।
- छत डालना मजबूरी हो तो काम करने वालों को पहले मीठा खिलाएं।
- चारपाई या बेड खरीद लिया हो तो उसका इस्तेमाल पंचक खत्म होने के बाद ही शुरू करें।
अगला पंचक कब है?
दिसंबर 2026 के बाद अगला पंचक 11 जनवरी से 15 जनवरी 2027 तक रहेगा — सोमवार से शुक्रवार, यानी ये भी राज पंचक ही होगा। (समय की सूक्ष्म गणना hinducalendar.co.in के पंचांग के अनुसार है; अपने शहर का स्थानीय पंचांग भी देख लें।)
आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पंचक में विवाह कर सकते हैं?
परंपरा में विवाह जैसे शुभ संस्कार पंचक में टालने की सलाह है, खासकर मृत्यु पंचक में। लेकिन अंतिम फैसला अपने कुल-पंडित या पारिवारिक ज्योतिषी से पूछकर लें — वे कुंडली देखकर सही सलाह दे सकते हैं।
चारपाई या बेड खरीदना क्यों मना है?
मान्यता है कि पंचक में खरीदी गई चारपाई पर सोने वाले को स्वास्थ्य या पारिवारिक कष्ट होता है, खासकर शतभिषा नक्षत्र के दिन। खरीद भी हो जाए तो इस्तेमाल पंचक के बाद शुरू करें।
क्या राज पंचक में सरकारी काम शुभ होते हैं?
लोकमान्यता में हां — सोमवार वाला पंचक अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है। पर कुछ आधुनिक पंचांग इसे सिर्फ नाम मानते हैं। दोनों राय आपके सामने हैं; महत्वपूर्ण काम पर अपने ज्योतिषी से सलाह जरूर लें।
