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धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या न खरीदें: शुभ-अशुभ की पूरी सूची

panditraina·October 13, 2026· 1 min read
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Dhanteras shopping - gold coins, silver vessels, Lakshmi-Ganesha idols

धनतेरस आते ही बाज़ारों में रौनक छा जाती है — और हर चेहरे पर एक ही सवाल: इस बार क्या खरीदना शुभ रहेगा? धनतेरस 2026 इस बार शुक्रवार, 6 नवंबर को है (त्रयोदशी तिथि उसी सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होगी), और यह दीवाली के पाँच दिनों की शुरुआत भी है। इस दिन क्या खरीदना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए — लोक परंपराओं की एक पूरी सूची चली आ रही है। चलिए, दोनों सूचियाँ साफ-साफ समझते हैं।

धनतेरस पर खरीदारी क्यों इतनी शुभ मानी जाती है

मान्यता है कि कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे — इसलिए इस दिन को धनतेरस कहते हैं, और धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता के रूप में पूजा जाता है। दूसरी कथा कहती है कि इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी और कुबेर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस पर नई चीज़ — खासकर धातु — घर लाना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

धनतेरस की तारीख और पूजा मुहूर्त की पूरी जानकारी हमारी धनतेरस 2026 गाइड में है, दीवाली के पाँच दिनों का कैलेंडर भी देखें, और लक्ष्मी-पूजन के स्तोत्र हमारी सनातन शास्त्र लाइब्रेरी में मिलेंगे।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है

  • सोना-चांदी के आभूषण और सिक्के: धनतेरस की सबसे पारंपरिक खरीदारी — मान्यता है कि इससे लक्ष्मी और कुबेर की कृपा बनी रहती है। बजट कम हो तो एक छोटा चांदी का सिक्का भी काफी।
  • बर्तन (पीतल, तांबा या मिट्टी के): धन्वंतरि के अमृत-कलश की कथा से जुड़ा सबसे पुराना रिवाज। अपनी क्षमता के अनुसार खरीदें — बस लोहा और एल्युमिनियम इसमें नहीं आते (नीचे बताया है क्यों)।
  • गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति: धनतेरस पर प्रतिमा घर लाकर दीवाली के दिन उनकी पूजा करने की परंपरा है।
  • कुबेर यंत्र या महालक्ष्मी यंत्र: मान्यता है कि इन्हें पीले वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रखने से कुबेर और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
  • दीपक और पूजा सामग्री: इस दिन दीपक जलाने का विशेष महत्व है — यमराज के निमित्त एक दीया जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहते हैं। पूजा-हवन सामग्री की सूची भी काम आएगी।
  • धनिया के बीज: पूजा-स्थल पर रखना शुभ माना जाता है, और दीवाली पर इन्हें बो देने की परंपरा है — अंकुरित पौधे शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।

धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए

नीचे की बातें लोक मान्यताओं पर आधारित हैं — कोई वेद-वाक्य नहीं, पर पीढ़ियों से चली आ रही सावधानियाँ:

  • लोहे की वस्तुएँ: मान्यता है कि लोहा शनिदेव का कारक है, इसलिए इस दिन लोहा खरीदने से कुबेर की कृपा रुक जाती है।
  • एल्युमिनियम का सामान: मान्यता के अनुसार इस धातु पर राहु का प्रभाव माना जाता है, जो दुर्भाग्य लाने वाला समझा जाता है।
  • धारदार या नुकीली चीज़ें: चाकू, कैंची, ब्लेड, नेल कटर — मान्यता है कि ये घर के सौभाग्य को “काटने” का प्रतीक हैं।
  • कांच, प्लास्टिक, तेल-घी: मान्यता है कि कांच-प्लास्टिक जैसी नाज़ुक चीज़ें अस्थिरता का, और तेल-घी फिसलन व क्षय का प्रतीक हैं।
  • खाली बर्तन: रिक्तता का प्रतीक माना जाता है — बर्तन खरीदें तो उसमें कुछ मिठाई या अनाज रखकर लाएं।
  • काले रंग के कपड़े, पुराना या नकली सामान: काला रंग शनि से जुड़ा माना जाता है; पुराना या नकली सामान नई शुरुआत के भाव के विरुद्ध माना जाता है।

झाड़ू — शुभ या अशुभ? दोनों पक्ष सुन लीजिए

एक मज़ेदार मतभेद है। एक परंपरा कहती है कि धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर दीवाली के दिन उसकी पूजा करनी चाहिए — स्वच्छता ही लक्ष्मी का वास है। दूसरी परंपरा कहती है कि झाड़ू खरीदना लक्ष्मी के चले जाने का प्रतीक है, इसलिए इससे बचें। दोनों लोक मान्यताएँ हैं; आपके घर में जो परंपरा चली आ रही है, उसी का पालन करें।

खरीदारी से पहले एक छोटी सलाह

बड़ी खरीदारी का समय चुनते समय पंचांग देख लेना अच्छा रहता है — हमारे राहुकाल कैलकुलेटर से उस दिन का अशुभ समय पता करके उसके बाद खरीदारी करें। और हाँ — कर्ज़ लेकर सोना खरीदने से अच्छा है श्रद्धा से छोटा सिक्का खरीदना। लक्ष्मी जी बाज़ार की भीड़ नहीं, नीयत देखती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या धनतेरस पर सिर्फ़ चांदी का सिक्का खरीदना काफी है?
हाँ। मान्यता के अनुसार सोना-चांदी धातु का प्रतीक है — एक छोटा चांदी का सिक्का या लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्का पूरी परंपरा निभा देता है।

क्या ऑनलाइन खरीदारी उतनी ही शुभ मानी जाती है?
यह आधुनिक सवाल है, परंपरा में इसका उत्तर नहीं मिलेगा। मान्यता धातु घर लाने की है, दुकान पर जाने की नहीं — इसलिए ऑनलाइन खरीदी धातु भी उतनी ही शुभ मानी जा सकती है, बस डिलीवरी धनतेरस के दिन या उससे पहले आ जाए तो अच्छा।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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