हर साल कार्तिक की अमावस्या को जब घर-घर दीये जल उठते हैं, तो हर बच्चा पूछता है — आखिर दिवाली मनाते क्यों हैं? जवाब एक नहीं, पांच हैं। एक ही रात में पांच कथाएं मिलती हैं — रामायण की घर वापसी से लेकर जैन परंपरा के निर्वाण और सिख इतिहास के बंदी छोड़ दिवस तक। 2026 में दिवाली रविवार, 8 नवंबर को है — आइए पांचों कथाएं संक्षेप में समझते हैं।
1. राम की घर वापसी — सबसे प्रसिद्ध कथा
14 वर्ष का वनवास पूरा करके जब श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी दीयों से जगमगा उठी। रावण पर विजय के बाद यह खुशी का इजहार था — अमावस्या की अंधेरी रात में भी रौशनी की बाढ़। अयोध्या वासियों ने दीयों की कतारों से अपने राजा का स्वागत किया था — उसी रात की स्मृति में हर साल दिवाली पर दीये जलते हैं।
मेरे हिसाब से यही कथा दिवाली के दिल के सबसे करीब है — घर वापसी का सुख। पूरी कथा रामायण के 108 श्लोकों में पढ़ें।
2. नरकासुर वध — छोटी दिवाली की कथा
दिवाली से ठीक एक दिन पहले नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) की कथा है। असुर राजा नरकासुर ने करीब 16,000 राजकुमारियों को कैद कर रखा था। श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर आए और नरकासुर का वध हुआ — मान्यता है कि सत्यभामा (भू-देवी के अंश) के हाथों उसकी मृत्यु का वरदान फला। मरते समय नरकासुर ने वर मांगा कि उसके वध की रात दीपों से मनाई जाए — अंधकार पर प्रकाश की विजय की याद में।
दक्षिण भारत में दीपावली मुख्यतः इसी कथा के नाम पर मनाई जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीखें भी देखें।
3. समुद्र मंथन से लक्ष्मी का प्राकट्य
पुराणों के अनुसार देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे लक्ष्मी प्रकट हुईं — कमल पर विराजमान, तेजोमय। कई परंपराओं के अनुसार उनका प्राकट्य कार्तिक अमावस्या की उसी रात हुआ था, जिसे आज हम दिवाली कहते हैं। लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण किया — तभी से माना जाता है कि समृद्धि वहीं टिकती है जहां धर्म हो। इसीलिए दिवाली की रात घर-घर लक्ष्मी पूजा होती है।
लक्ष्मी पूजा के मंत्र और श्री सूक्तम आप हमारे सानातन शास्त्र पुस्तकालय में मूल रूप में पढ़ सकते हैं।
4. महावीर स्वामी का निर्वाण — जैन परंपरा
जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर ने पावापुरी में कार्तिक अमावस्या की रात निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया — परंपरा के अनुसार ईसा से लगभग 527 वर्ष पूर्व। उसी रात उनके प्रमुख शिष्य गौतम गणधर को केवलज्ञान मिला। कहा जाता है कि उस रात देवताओं और मनुष्यों ने दीप जलाकर उनके ज्ञान की रौशनी जीवित रखने का संकल्प लिया था। जैन धर्म में दिवाली वर्ष का अंतिम दिन भी है, और पटाखे जलाना निषेध है।
5. बंदी छोड़ दिवस — सिख परंपरा
सिख इतिहास में दिवाली के दिन बंदी छोड़ दिवस मनाया जाता है — मुक्ति का दिन। 1619 में मुगल बादशाह जहांगीर ने छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब को ग्वालियर के किले में कैद कर रखा था। रिहाई के आदेश पर गुरु साहिब ने अकेले बाहर आने से इनकार कर दिया — शर्त थी कि किले के 52 अन्य राजा भी साथ रिहा होंगे। बादशाह ने कहा कि जो गुरु के चोगे को पकड़कर बाहर आएगा, वही मुक्त होगा — गुरु साहिब ने 52 कलियों वाला चोगा बनवाया और सभी 52 राजकुमारों को साथ लेकर बाहर आए। अमृतसर लौटने पर पूरी नगरी दीयों से जगमगाई — तभी से यह बंदी छोड़ दिवस है।
एक त्योहार, कई रंग
भारत के अलग-अलग हिस्सों में दिवाली के अपने रंग हैं — बंगाल और ओडिशा में इसी रात काली पूजा, तमिलनाडु में नरक चतुर्दशी को ही मुख्य दीपावली, और गुजरात में नया विक्रम संवत वर्ष। 2026 का दीपावली 5-दिवसीय कैलेंडर देखें — धनतेरस 6 नवंबर से भाई दूज 11 नवंबर तक।
तो इस दिवाली जब दीया जलाएं, तो सिर्फ खुशी ही नहीं — इन पांच में से कोई एक कथा भी अपने बच्चों को सुनाएं। त्योहार की रौशनी तभी पूरी होती है, जब उसके पीछे की कहानी जिंदा रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 2026 में दिवाली कब है? — रविवार, 8 नवंबर 2026 (कार्तिक अमावस्या)। तिथि-नक्षत्र की पुष्टि आज के पंचांग में कर सकते हैं।
- क्या दिवाली सिर्फ हिंदुओं का त्योहार है? — नहीं। जैन धर्म में यह महावीर के निर्वाण का दिन है, सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस — तीनों धर्मों में रौशनी, मुक्ति और ज्ञान का साझा उत्सव।
- दिवाली और दीपावली में क्या अंतर है? — कोई अंतर नहीं; दीपावली (दीपों की पंक्ति) ही मूल संस्कृत शब्द है, जिसका बोलचाल का रूप दिवाली है।
