गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख — 9 और 10 नवंबर, दोनों सही
इस बार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा दो दिनों में पड़ रही है — 9 नवंबर दोपहर ~12:31 से 10 नवंबर दोपहर ~2 बजे तक। इसलिए कई परिवार 9 नवंबर की शाम को अन्नकूट के साथ पूजा कर रहे हैं, और कई लोग 10 नवंबर की सुबह (दिल्ली पंचांग: 6:40–8:50) मना रहे हैं। संक्षेप में:
“गोवर्धन पूजा / अन्नकूट — 9–10 नवंबर: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर ~12:31 से 10 नवंबर दोपहर ~2 बजे तक। शाम का अन्नकूट 9 नवंबर (drikpanchang); प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर सुबह 6:40–8:50 (दिल्ली पंचांग) — अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मनाएं।”
दोनों दिन ठीक हैं — आज का पंचांग देखकर अपने शहर का मुहूर्त ज़रूर मिला लें। इसके बाद त्योहारों की कतार है: दीपावली का 5-दिन का कैलेंडर यहाँ देखें, और भाई दूज 11 नवंबर (बुधवार) को है।
कथा: जब सात साल के कृष्ण ने पहाड़ उठा लिया
भागवत पुराण के अनुसार, हर साल की तरह बृजवासी देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे — ताकि वर्षा अच्छी हो और फसलें लहलहाएं। तभी बालक कृष्ण ने पूछा: इंद्र की पूजा क्यों? अन्न और जल तो हमें गोवर्धन पर्वत से मिलता है; गायों का चारा, फल, जड़ी-बूटी — सब वहीं से आता है। पूजा उसी की होनी चाहिए जो सच में देता है।
बृजवासी मान गए। यह देखकर इंद्र क्रोधित हुए और सात दिन तक ऐसी मूसलाधार वर्षा कराई कि गोकुल डूबने लगा। तब कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका (सबसे छोटी उंगली) पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सबको उनकी गायों समेत पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। सात दिन-सात रात बृजवासी इस पर्वत-छाते के नीचे सुरक्षित रहे। अंत में इंद्र का अभिमान टूटा — उन्होंने क्षमा मांगी और कृष्ण की पूजा की। तभी से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है।
यह सिर्फ चमत्कार की कहानी नहीं है। इसका संदेश साफ है — जो प्रकृति तुम्हें पालती है, उसी की पूजा करो; और अहंकार चाहे देवता का ही क्यों न हो, टूटता ही है।
अन्नकूट: 56 भोग का पहाड़ क्यों?
इस दिन को अन्नकूट भी कहते हैं — ‘अन्न’ + ‘कूट’, यानी अन्न का पहाड़। गोवर्धन पर्वत के सामने अनाज, दालें, सब्ज़ियां, फल और मिठाइयां पहाड़ की तरह सजाकर भोग लगाया जाता है, इसीलिए यह नाम पड़ा।
परंपरा के अनुसार कृष्ण को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं — ‘छप्पन भोग’। मान्यता है कि पर्वत उठाने के सात दिनों में कृष्ण ने भोजन नहीं किया; सामान्य दिनों में वे आठ भोग लेते थे, इसलिए बृजवासियों ने 8 × 7 = 56 भोग बनाकर आभार जताया।
एक ईमानदार बात — घर पर 56 पकवान बनाना न तो सबके बस की बात है, न ज़रूरी है। श्रद्धा से बने 5-7 भोग भी उतने ही स्वीकार्य हैं। अन्नकूट का असली भाव यह है कि जो कुछ घर में बना है, वह पहले भगवान को अर्पित हो — कृतज्ञता का पहाड़, दिखावे का नहीं।
घर पर गोवर्धन पूजा की सरल विधि
- गोबर का गोवर्धन: आंगन में गाय के गोबर से पर्वत की आकृति बनाएं — मान्यता है कि गाय का गोबर अत्यंत पवित्र होता है। कुछ जगहों पर चारों कोनों में करवा की सींकें लगाई जाती हैं।
- गौ-पूजन: गायों का श्रृंगार करें, आरती उतारें, फल-मिठाइयां खिलाएं। गायों को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। पास में गौशाला हो तो चारा खिलाना बहुत शुभ है।
- पर्वत की पूजा: पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं; घर के बने भोग पहले श्रीकृष्ण को अर्पित करें।
- प्रसाद बांटें: अन्नकूट का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटें — मान्यता है कि इससे घर में समृद्धि और सुख-शांति आती है।
पूजा के बाद कृष्ण की आरती ज़रूर करें — आरतियों का संग्रह यहाँ मिलेगा। कृष्ण-भक्ति के ग्रंथों के लिए हमारा सनातन शास्त्र पुस्तकालय देखें।
गायें: इस पूजा का असली दिल
गोवर्धन का अर्थ ही है — गायों का वर्धन, गायों का पालन। यह त्योहार उस रिश्ते का उत्सव है जो गाय, पर्वत, वर्षा और अन्न के बीच है। कृष्ण ने इंद्र-पूजा रोककर जो संदेश दिया था, वह आज और भी प्रासंगिक है — देवता आसमान में नहीं, उस प्रकृति में हैं जो हमें रोज़ पालती है।
तो इस गोवर्धन पूजा पर एक काम ज़रूर कीजिए — किसी गाय को चारा खिलाइए। भोग 5 बनें या 56, यह छोटा-सा काम इस त्योहार की आत्मा को पूरा कर देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?
प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर ~12:31 से 10 नवंबर दोपहर ~2 बजे तक — शाम का अन्नकूट 9 नवंबर, प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर। स्थानीय पंचांग के अनुसार मनाएं।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या अंतर है?
एक ही दिन के दो नाम — ‘गोवर्धन पूजा’ पर्वत-पूजन पर ज़ोर देती है, ‘अन्नकूट’ भोग की परंपरा पर। दोनों एक साथ मनाए जाते हैं।
घर पर गोवर्धन कैसे बनाएं?
आंगन में गाय के गोबर से छोटा-सा पर्वत बनाएं, दीपक जलाएं, फूल-धूप चढ़ाएं और घर के बने भोग अर्पित करें।
