वह सुबह, जब घर में फिर देवी का आगमन होता है
तस्वीर मन में बनाइए — अप्रैल की एक सुबह। आँगन में अभी हल्की ठंडक है, तुलसी के पास दीया जल रहा है, और माँ रसोई से आवाज़ देती हैं — “बेटा, आम के पत्ते और नारियल ले आओ, कलश सजाना है।” दादी जौ के दाने हथेली में लेकर कहती हैं — “आज से नौ दिन देवी हमारे घर में रहेंगी।” यही चैत्र नवरात्रि है — वसंत की नवरात्रि, जो हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है और भगवान श्री राम के जन्मदिन, राम नवमी पर समाप्त होती है।
नौ दिन, नौ देवियाँ, और हर दिन एक नया स्वरूप। इसी दिन से हिंदू नववर्ष भी शुरू होता है — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत में उगादि मनाई जाती है।
चैत्र नवरात्रि 2027 — नौ दिनों की सूची
द्रिक पंचांग के अनुसार 2027 में नवरात्रि बुधवार, 7 अप्रैल से गुरुवार, 15 अप्रैल तक है — नौ दिन, बिना किसी तिथि-क्षय के, लगातार —
7 अप्रैल, बुधवार — प्रतिपदा: माँ शैलपुत्री, घटस्थापना। 8 अप्रैल, गुरुवार — द्वितीया: माँ ब्रह्मचारिणी। 9 अप्रैल, शुक्रवार — तृतीया: माँ चंद्रघंटा। 10 अप्रैल, शनिवार — चतुर्थी: माँ कूष्मांडा (इसी दिन विनायक चतुर्थी भी है)। 11 अप्रैल, रविवार — पंचमी: माँ स्कंदमाता। 12 अप्रैल, सोमवार — षष्ठी: माँ कात्यायनी। 13 अप्रैल, मंगलवार — सप्तमी: माँ कालरात्रि। 14 अप्रैल, बुधवार — अष्टमी: माँ महागौरी, महाष्टमी और संधि पूजा। 15 अप्रैल, गुरुवार — नवमी: माँ सिद्धिदात्री और राम नवमी, नवरात्रि का पारण।
नौ देवियों की यह क्रमबद्ध सूची शारद नवरात्रि वाली ही है — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक। दिन-वार पूजा और भोग की पूरी विधि हमारी नवदुर्गा मार्गदर्शिका में विस्तार से दी गई है।
घटस्थापना — कलश स्थापना का मुहूर्त और विधि
नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है — मिट्टी के कलश में जल, आम के पत्ते और नारियल रखकर देवी का आसन स्थापित किया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार दिल्ली में 2027 का घटस्थापना मुहूर्त 7 अप्रैल की सुबह लगभग 6:05 से 7:26 बजे तक है। अपने शहर का सही समय आज का पंचांग में देख लें, क्योंकि मुहूर्त शहर के सूर्योदय के अनुसार थोड़ा बदलता है।
कलश स्थापना दिन के पहले तिहाई हिस्से में करनी चाहिए — रात में घटस्थापना वर्जित मानी जाती है, और चित्रा नक्षत्र के समय भी कलश नहीं रखा जाता। कलश के पास मिट्टी में जौ बोए जाते हैं — नौ दिन में हरे हुए जौ समृद्धि और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।
नौ दिन, नौ देवियाँ — हर दिन का एक भाव
पहले दिन माँ शैलपुत्री — पर्वतराज हिमालय की पुत्री, धैर्य और स्थिरता की देवी। दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी — तपस्या की देवी, मन की दृढ़ता देने वाली। तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा — माथे पर अर्धचंद्र, निर्भयता की देवी। चौथे दिन माँ कूष्मांडा — जिनकी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना मानी जाती है। पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता — कार्तिकेय की माँ, संतान-सुख की देवी। छठे दिन माँ कात्यायनी — ऋषि कात्यायन की पुत्री, मनचाहा वर मिलने की मान्यता। सातवें दिन माँ कालरात्रि — अंधकार को हरने वाली, जिनके सामने भय टिकता नहीं। आठवें दिन माँ महागौरी — श्वेत वस्त्रों वाली, शांति और पवित्रता की देवी। नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री — सभी सिद्धियों की दात्री, जिनकी पूजा से नवरात्रि पूर्ण होती है।
इन नौ दिनों में कई परिवार दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं — यह ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है और इसका मूल पाठ हमारे सनातन शास्त्र पुस्तकालय में पढ़ा जा सकता है। हर दिन की देवी के लिए अलग मंत्र और भोग की परंपरा है।
राम नवमी — नवरात्रि का समापन, 15 अप्रैल
नवरात्रि का नौवाँ दिन सबसे बड़ा है — चैत्र शुक्ल नवमी, भगवान श्री राम का जन्मदिन। 2027 में राम नवमी गुरुवार, 15 अप्रैल को है। मध्याह्न मुहूर्त — जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ माना जाता है — दिल्ली के लिए लगभग सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक है, और जन्म का क्षण लगभग दोपहर 12:21 बजे बताया जाता है। यह समय शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देख लें।
मंदिरों में रामायण पाठ, भजन और दोपहर में जन्मोत्सव की झाँकी सजती है। कई घरों में इस दिन नवरात्रि का पारण होता है — कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोला जाता है। चैत्र नवरात्रि को इसी कारण राम नवरात्रि भी कहा जाता है — यह एकमात्र नवरात्रि है जो भगवान श्री राम के जन्म से जुड़ी है। और जैसे दीपावली की लक्ष्मी पूजा में देवी का आह्वान होता है, वैसे ही चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी घर में विराजती हैं।
व्रत के नियम और कन्या पूजन
नवरात्रि का व्रत सेहत के अनुसार रखें — नौ दिन का निराहार व्रत सबके लिए नहीं होता। अधिकांश परिवार फलाहार करते हैं: सेंधा नमक, कुट्टू-साबूदाना, फल और दूध। कई घरों में प्याज़-लहसुन और अनाज पूरी तरह वर्जित रहता है। व्रत का असली नियम यह है — सात्त्विक भोजन, सुबह-शाम पूजा, और नौ दिन तक मन को शांत रखना।
अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन होता है — नौ छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है और हलवा-पूरी-चने का प्रसाद दिया जाता है। इसी दिन जौ का विसर्जन और कलश का उठान होता है। जो लोग पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख पाते, वे पहले और आखिरी दिन का व्रत रखकर भी नवरात्रि मना सकते हैं — परंपरा में यह भी स्वीकार्य है। हर महीने की दुर्गा अष्टमी की तारीखें मासिक दुर्गाष्टमी सूची में और चैत्र नवरात्रि की साल-दर-साल तारीखें चैत्र नवरात्रि तिथि-पत्र में देखी जा सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चैत्र नवरात्रि 2027 कब है? बुधवार, 7 अप्रैल से गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 तक — नौ दिन, बिना किसी तिथि-क्षय के।
घटस्थापना किस समय करें? दिल्ली में 7 अप्रैल की सुबह लगभग 6:05 से 7:26 बजे का मुहूर्त है। अपने शहर का समय पंचांग से जाँच लें।
राम नवमी 2027 किस दिन है? गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 — नवरात्रि का आखिरी दिन, मध्याह्न मुहूर्त लगभग 11:04 बजे से 1:38 बजे तक।
