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नवदुर्गा: 9 देवियों का महत्व, पूजा विधि और भोग — नवरात्रि संपूर्ण गाइड

panditraina·October 11, 2026· 1 min read
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Goddess Durga with lion and the nine divine forms of Navratri

नौ दिन, नौ देवियां: तारीख, महत्व और भोग

शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुकी है — इस बार 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक। आज (12 अक्टूबर) दूसरा दिन है, मां ब्रह्मचारिणी का। रोज़ सुबह घरों और मंदिरों में मां दुर्गा के एक नए स्वरूप की पूजा होती है — पर अक्सर हम नाम तो जानते हैं, पर हर देवी की कहानी, उनका भोग और जाप का मंत्र ठीक से पता नहीं होता। यही इस गाइड में है: एक ही जगह, नौ देवियों की पूरी जानकारी।

परंपरा के अनुसार हर दिन मां के एक स्वरूप की पूजा होती है। इस बार का दिन-वार क्रम इस प्रकार है:

  • 11 अक्टूबर — शैलपुत्री: हिमालय की पुत्री, बैल पर सवार, एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल। प्रकृति और नवजीवन की शक्ति का स्वरूप। भोग: गाय का घी। मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। शुभ रंग: नारंगी।
  • 12 अक्टूबर — ब्रह्मचारिणी: तपस्या का स्वरूप — हाथ में जपमाला और कमंडल, नंगे पैर चलने वाली देवी। संयम और धैर्य की प्रतीक। भोग: शक्कर या मिश्री। मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। शुभ रंग: सफ़ेद।
  • 13 अक्टूबर — चंद्रघंटा: मस्तक पर घंटे जैसा आधा चंद्रमा, बाघ पर सवार, दस भुजाओं में शस्त्र। दुष्टों का नाश करने वाली युद्ध-देवी, जो भक्तों की रक्षा करती हैं। भोग: दूध या दूध की खीर। मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः। शुभ रंग: लाल।
  • 14 अक्टूबर — कूष्मांडा: आठ भुजाओं वाली देवी, जिनकी एक मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना मानी जाती है। स्वास्थ्य और ऊर्जा की दाता। भोग: मालपुआ। मंत्र: ॐ देवी कूष्मांडायै नमः। शुभ रंग: शाही नीला।
  • 15 अक्टूबर — स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की मां — ममता, सुरक्षा और ज्ञान का स्वरूप। भोग: केला। मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः। शुभ रंग: पीला।
  • 16 अक्टूबर — कात्यायनी: ऋषि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई योद्धा देवी, महिषासुर का वध करने वाली। साहस और विजय की देवी। भोग: शहद। मंत्र: ॐ देवी कात्यायिन्यै नमः। शुभ रंग: हरा।
  • 17 अक्टूबर — कालरात्रि: सबसे उग्र स्वरूप — अज्ञान और नकारात्मकता का नाश करने वाली। डरें नहीं; ये देवी अपने भक्तों की सबसे बड़ी रक्षक हैं। भोग: गुड़। मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। शुभ रंग: स्लेटी।
  • 18 अक्टूबर — महागौरी: श्वेत, शांत और उज्ज्वल स्वरूप — पापों के शुद्धिकरण की देवी। यही दिन महा अष्टमी है, जब कन्या पूजन भी होता है। भोग: नारियल। मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः। शुभ रंग: बैंगनी।
  • 19 अक्टूबर — सिद्धिदात्री: सभी सिद्धियों की दाता — साधना का अंतिम फल। महानवमी का दिन, व्रत का समापन। भोग: तिल (कई घरों में हलवा-पूरी-चना भी)। मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। शुभ रंग: मोरपंखी हरा।

20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) है — नवरात्रि का समापन। पूरी तिथि-सूची के लिए शारदीय नवरात्रि की तिथियों वाला हमारा पेज देखें।

घर पर पूजा की सरल विधि

पूरा हवन-विधान सबके बस का नहीं — और मां को इतना औपचारिक भाव भी नहीं चाहिए। घर पर इतना कीजिए: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थान पर मां की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीप जलाएं। गणेश जी का स्मरण करके उस दिन के स्वरूप का ध्यान करें, फूल-माला-चंदन चढ़ाएं, मंत्र का 108 बार जाप करें, भोग अर्पित करें और दुर्गा आरती गाएं। नवरात्रि भर में एक बार सनातन शास्त्र पुस्तकालय से दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें — देवी स्तोत्रों का ये संग्रह हिंदी में भी उपलब्ध है।

जो लोग पूरे नौ दिन व्रत नहीं रख सकते, वे पहले और आखिरी दिन या अष्टमी-नवमी का व्रत रखें — परंपरा में ये विकल्प हमेशा से है। नौ दिन के व्रत के सरल नियम विस्तार से यहां बताए गए हैं: नौ दिन के व्रत के सरल नियम।

अष्टमी-नवमी (18-19 अक्टूबर): कन्या पूजन की विधि

अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन होता है — नौ छोटी बच्चियों को मां के नौ स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है। हलवा, पूरी और चने का भोग बनाया जाता है, कन्याओं के पैर धोकर तिलक लगाया जाता है, भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं। सच कहूं तो नवरात्रि का सबसे सुंदर पल यही है — जब बच्चियां सच में देवी जैसी मुस्कुराती हैं।

व्रत में ये छोटी बातें याद रखें

  • सात्विक भोजन रखें — प्याज, लहसुन और तामसिक चीज़ों से दूरी। बीमार, गर्भवती और बच्चे चिकित्सक की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें।
  • दुर्गा चालीसा का रोज़ पाठ करें — सप्तशती जितना ही असरदार और बहुत छोटा विकल्प।
  • हर दिन के रंग को कपड़ों में अपनाएं (रंग ऊपर दिए हैं) — लेकिन याद रखें, ये लोकप्रिय परंपरा है, धार्मिक बाध्यता नहीं।
  • नवरात्रि के बाद भी हर महीने मासिक दुर्गाष्टमी को मां की पूजा जारी रखें — नौ दिन की साधना का असली फल यही है कि वो आदत बन जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नवरात्रि में हर दिन अलग भोग चढ़ाना जरूरी है?
जरूरी नहीं, पर परंपरा है। क्षेत्र और घर-परिवार के रिवाज़ के हिसाब से भोग बदल भी सकता है। भाव ही असली भोग है — चीनी का दाना भी श्रद्धा से चढ़े तो काफी।

नौ दिन का व्रत न रख सकें तो क्या करें?
पहले और आखिरी दिन, या अष्टमी-नवमी का व्रत रखें। या सिर्फ सात्विक भोजन खाकर नियम से पूजा करें। मां भाव देखती हैं, पेट नहीं।

कन्या पूजन किस दिन करें — अष्टमी या नवमी?
दोनों दिन सही हैं। बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में अष्टमी खास है, उत्तर भारत में नवमी। अपने परिवार के रिवाज़ को फॉलो करें।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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