बुधवार की सुबह अक्सर ऐसी होती है — बच्चे का टिफिन, ऑफिस की मेल, दुकान का हिसाब, और बीच में कोई ऐसी बात जो कहनी तो आसान थी, पर कहने का सही तरीका नहीं सूझा। बुधवार, यानी बुध का दिन, ठीक इसी चीज़ से जुड़ा है — बोलने, समझने और सौदा तय करने की कला से।
इस बार यह बुधवार और भी ध्यान देने लायक है, क्योंकि बुध 24 अक्टूबर से 13 नवंबर तक वक्री चल रहे हैं। वक्री बुध के दिनों में कागज़ पढ़कर दस्तखत करना, कोई बड़ा वादा करना या जल्दबाज़ी में बात कहना — इन सबमें थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह परंपरा देती है। नीचे दिए उपाय सरल हैं, घर में हो जाते हैं, और इनमें कोई डराने वाली बात नहीं है।
बुधवार बुध का दिन क्यों है?
ज्योतिष में हर वार का एक ग्रह स्वामी माना जाता है, और बुधवार के स्वामी बुध हैं। बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार, लेखन और हिसाब-किताब का कारक माना जाता है। बुध मिथुन और कन्या राशियों के स्वामी हैं, कन्या में उच्च के और मीन में नीच के माने जाते हैं। यही वजह है कि पढ़ने-लिखने वाले, व्यापारी, वकील और बोलने के काम से जुड़े लोग बुधवार को खास मानते हैं।
बुध का रंग हरा माना जाता है। इसीलिए बुधवार को हरे कपड़े पहनना, हरी मूंग का दान करना और गाय को हरा चारा खिलाना बुध के उपायों में गिना जाता है।
गणेश जी को दूर्वा — सबसे सरल उपाय
बुधवार की पूजा की शुरुआत गणेश जी से होती है। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें, गणेश जी के सामने 21 दूर्वा अर्पित करें और एक मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ।
इसके साथ गणेश जी का सरल मंत्र जप सकते हैं — ॐ गं गणपतये नमः। 11, 21 या 108 बार, जितनी सुविधा हो, शांत मन से जपें। गिनती से ज़्यादा मायने इस बात का है कि जप के बाद दिन में बोलने से पहले एक पल रुकने की आदत बने। वही आदत बुध का असली उपाय है।
विष्णु जी की पूजा और तुलसी
बुधवार को विष्णु जी की पूजा की भी परंपरा है। बुध के अधिष्ठाता विष्णु माने जाते हैं, इसलिए कई घरों में बुधवार को तुलसी के पौधे में जल दिया जाता है और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जाता है। विष्णु जी की पूजा में दूर्वा की जगह तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है।
अगर लंबा पाठ संभव न हो, तो छोटा सा नियम भी काफी है — सुबह विष्णु जी का स्मरण, तुलसी में जल, और दिन में किसी एक ज़रूरतमंद की मदद।
हरी चीज़ों का दान और बुधवार का व्रत
बुधवार के दान में हरी मूंग, हरी सब्ज़ियाँ, हरे वस्त्र और किताबें-कापियाँ गिनी जाती हैं। साबुत हरी मूंग किसी ज़रूरतमंद को देना बुध का सबसे जाना-माना दान है, और गाय को हरा चारा खिलाना भी बुधवार के उपायों में आता है। किताबों का दान इसलिए जुड़ा है, क्योंकि बुध विद्या के भी कारक हैं।
बुधवार का व्रत परंपरा के अनुसार 21 बुधवार तक रखा जाता है। इस व्रत में सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखकर हरी सब्ज़ियाँ और फल ग्रहण करने की परंपरा है। शरीर की स्थिति, उम्र और काम को देखकर ही व्रत रखें — व्रत का उद्देश्य शरीर को तकलीफ़ देना नहीं, मन को संयम सिखाना है।
बुध का बीज मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः बुधवार की सुबह 108 बार जपने की परंपरा है। साथ में छोटा मंत्र ॐ बुं बुधाय नमः भी जपा जाता है।
वाणी और व्यापार के लिए बुधवार की आदतें
बुध वाणी के ग्रह हैं, इसलिए बुधवार को तीन आदतें सबसे ज़्यादा काम आती हैं। पहली — सच बोलना और कड़वी बात को भी नरम लहजे में कहना। दूसरी — वादा सोचकर करना, और किया हुआ वादा निभाना। तीसरी — व्यापार या नौकरी के कागज़ पर दस्तखत से पहले उसे दोबारा पढ़ना, खासकर जब बुध वक्री चल रहे हों।
पन्ना (एमराल्ड) बुध का रत्न माना जाता है, पर इसे बिना ज्योतिषी की सलाह के नहीं पहनना चाहिए। अपनी कुंडली में बुध की स्थिति देखें, फिर किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेकर ही रत्न के बारे में सोचें।
आने वाले दिनों में दो बड़े त्योहार भी पड़ रहे हैं — करवा चौथ 29 अक्टूबर को और दीपावली 8 नवंबर को। बुधवार के ये छोटे नियम उन दिनों की भागदौड़ में भी मन को ठहराव देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बुधवार को क्या नहीं करना चाहिए? परंपरा के अनुसार बुधवार को झूठ, कड़वी बात और जल्दबाज़ी में किया गया वादा — इन तीनों से बचना चाहिए। व्यापार के कागज़ बिना पढ़े न छोड़ें। यह कोई डर नहीं, बल्कि समझदारी की सलाह है।
क्या हर बुधवार व्रत रखना ज़रूरी है? नहीं। व्रत एक परंपरा है, मजबूरी नहीं। जो व्रत न रख सकें, वे दान, गणेश पूजा और सच बोलने के नियम से भी बुधवार मना सकते हैं।
मंत्र कहाँ से सीखें? वैदिक मंत्र संग्रह में ग्रहों के मंत्र दिए गए हैं, और सनातन शास्त्र पुस्तकालय में नवग्रह सूक्त भी पढ़ा जा सकता है। एक मंत्र अच्छे से सीखना, दस मंत्र रटने से बेहतर है।
