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गुरुवार व्रत विधि: बृहस्पति को प्रसन्न करने के सरल नियम

panditraina·October 15, 2026· 1 min read
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Guruvar vrat — banana tree puja with yellow cloth

परिचय

गुरुवार की सुबह भारतीय घरों में एक अलग ही रंग होता है। कहीं मां केले के पेड़ पर पीला धागा बांध रही हैं, तो कहीं रसोई से चने की दाल की खुशबू आ रही है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है — गुरुवार का व्रत सैकड़ों सालों से देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता रहा है, और इसके नियम इतने सरल हैं कि नौकरीपेशा लोग भी इसे निभा लेते हैं।

यह व्रत कौन और क्यों रखता है

मान्यता है कि बृहस्पति सुख, समृद्धि, ज्ञान और दांपत्य जीवन के कारक ग्रह हैं। इसलिए यह व्रत उन महिलाओं में विशेष रूप से लोकप्रिय है जो दांपत्य सुख, विवाह में आ रही बाधाओं के निवारण और घर की सुख-शांति चाहती हैं। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर है या आर्थिक तंगी चल रही है, उन्हें भी ज्योतिषी गुरुवार का व्रत रखने की सलाह देते हैं।

परंपरा के अनुसार व्रत का संकल्प 16 गुरुवार तक लगातार रखा जाता है, और 17वें गुरुवार को इसका उद्यापन किया जाता है। अपनी जन्म कुंडली से जांच लें कि आपका बृहस्पति मजबूत है या कमजोर — उसी से व्रत का संकल्प तय होता है।

गुरुवार व्रत की विधि

गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में थोड़ी हल्दी मिला लें — इसे शुभ माना जाता है। फिर पीले वस्त्र पहनें। पूजा केले के पेड़ के नीचे की जाती है, क्योंकि माना जाता है कि केले में भगवान विष्णु और बृहस्पति दोनों का वास है।

  • केले की जड़ में शुद्ध जल, कच्चा दूध और हल्दी मिलाकर अर्पित करें।
  • पेड़ के तने पर हल्दी या पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीला धागा (कलावा) सात बार लपेटकर बांधें।
  • पेड़ की सात परिक्रमा करें।
  • भोग के रूप में भीगी हुई चने की दाल और गुड़ अर्पित करें — यही इस व्रत का मुख्य भोग माना गया है।
  • इसके बाद गुरुवार व्रत की कथा पढ़ें या सुनें और बृहस्पति के बीज मंत्र ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या सरल मंत्र ॐ बृहस्पतये नमः का 108 बार जाप करें।
  • शाम को विष्णु मंदिर या घर के मंदिर में दीप जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी शुभ माना जाता है — विष्णु स्तोत्र हमारे सनातन शास्त्र ग्रंथालय में उपलब्ध हैं।

बृहस्पति के उपायों के बारे में विस्तार से पढ़ना हो तो हमारा English लेख Jupiter Remedies: Thursday Fasts and the Power of Yellow भी देखें।

खाने के नियम — यही सबसे अहम हिस्सा है

गुरुवार व्रत में दिन में केवल एक समय भोजन किया जाता है और उसमें नमक नहीं खाया जाता। भोजन पीले रंग का होना चाहिए — चने की दाल, बेसन के व्यंजन, हल्दी युक्त भोजन। सादा, सात्विक और बिना नमक का पीला भोजन — बस यही नियम है।

दो बातों का ध्यान रखें: गुरुवार के दिन केले के पेड़ के पत्ते न तोड़ें और पेड़ को किसी तरह नुकसान न पहुंचाएं — इसे अशुभ माना जाता है। अगर किसी गुरुवार को व्रत छूट जाए तो घबराएं नहीं; परंपरा के अनुसार फिर से संकल्प लेकर शुरू कर दें।

गुरुवार व्रत की कथा (संक्षेप में)

कथा के अनुसार एक धनी व्यापारी हर गुरुवार व्रत रखता और दान-पुण्य करता था, लेकिन उसकी पत्नी कंजूस थी और दान से चिढ़ती थी। एक बार साधु वेश में स्वयं बृहस्पति देव आए और उन्होंने पत्नी को बृहस्पतिवार को अशुभ काम करने की सलाह दी। तीन ही गुरुवार में उसका सारा धन नष्ट हो गया और पति परदेश चला गया। बाद में बहिन से विधि सीखकर रानी और दासी ने सच्चे भाव से गुरुवार का व्रत किया, बृहस्पति प्रसन्न हुए और उनकी दरिद्रता दूर हो गई। यह कथा सिखाती है कि गुरुवार को पवित्रता और दान ही फल देते हैं, छल नहीं।

गुरुवार के आसपास पड़ने वाले अन्य विष्णु व्रतों की तारीखें हिंदू कैलेंडर और एकादशी तिथि पृष्ठ पर देखी जा सकती हैं। बृहस्पति का बीज मंत्र और अन्य ग्रह मंत्र वैदिक मंत्र संग्रह में मिलेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: गुरुवार का व्रत कब से शुरू करें?
उत्तर: मान्यता है कि शुक्ल पक्ष के किसी गुरुवार से व्रत शुरू करना शुभ होता है।

प्रश्न: क्या व्रत में केला खा सकते हैं?
उत्तर: इस पर परंपराओं में मतभेद है, इसलिए स्पष्ट नियम यह है कि केले के पेड़ के पत्ते न तोड़ें और पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं। खाने के मामले में अपने घर की परंपरा का पालन करें।

प्रश्न: क्या नौकरी करने वाले भी यह व्रत रख सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल। सुबह केले के पेड़ की पूजा करके दिन में एक बार बिना नमक का पीला भोजन — यही मुख्य नियम है। कथा और मंत्र जाप समय मिलने पर शाम को भी किए जा सकते हैं।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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