मार्च की वह एक रात, जब मंदिरों में घंटियों की आवाज़ देर रात तक गूँजती है और लोग नींद को एक तरफ रखकर भोलेनाथ का नाम जपते हैं — वही महाशिवरात्रि है। 2027 में यह पर्व शनिवार, 6 मार्च को पड़ रहा है, और तारीख-मुहूर्त पहले से जान लेना व्रत की तैयारी आसान कर देता है।
महाशिवरात्रि 2027: तारीख और मुहूर्त
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। 2027 में चतुर्दशी तिथि 6 मार्च को दोपहर करीब 12:03 बजे शुरू होकर 7 मार्च को दोपहर करीब 1:46 बजे समाप्त होगी। व्रत और रात की पूजा 6 मार्च की रात को होगी।
रात की सबसे महत्वपूर्ण पूजा निशिता काल की मानी जाती है, जो आधी रात के आसपास पड़ता है। इसका ठीक समय शहर के हिसाब से कुछ मिनट आगे-पीछे होता है — जैसे दिल्ली में यह रात करीब 12:07 से 12:57 बजे तक पड़ता है। इसलिए अपने शहर का सही समय आज के पंचांग में ज़रूर देख लें, एक ही समय पूरे देश पर लागू न करें।
शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है
मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी कारण यह रात शिव-शक्ति के मिलन की रात कही जाती है। एक और मान्यता के अनुसार इसी रात शिव ने तांडव किया था — सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार का वह दिव्य नृत्य।
शिवरात्रि का अर्थ ही है शिव की रात — दिन में व्रत और रात में जागकर पूजा। जो लोग साल भर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि होती है।
रात के चार प्रहर: पूजा का क्रम
शिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बाँटा जाता है और हर प्रहर में शिवलिंग का एक अभिषेक किया जाता है। परंपरा के अनुसार पहले प्रहर में जल से, दूसरे में दही से, तीसरे में घी से और चौथे में शहद से अभिषेक किया जाता है। हर अभिषेक के बाद बेलपत्र, सफेद फूल और चंदन अर्पित किए जाते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जप चलता रहता है।
चारों प्रहर जागना सबके लिए संभव नहीं होता। पूरी रात न जाग सकें तो आधी रात की निशिता काल पूजा भी पर्याप्त मानी जाती है।
घर पर सरल पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को साफ करके शिवलिंग या शिव की प्रतिमा स्थापित करें। संकल्प लें कि दिन भर व्रत रखेंगे और रात में पूजा करेंगे। दिन में शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाएँ, बेलपत्र अर्पित करें और समय मिलने पर शिव कथा या शिव स्तोत्र का पाठ करें।
शाम को दीया जलाकर रात की पूजा शुरू करें। अभिषेक में गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत का उपयोग होता है। बेलपत्र शिव को विशेष प्रिय माना जाता है, साथ में धतूरा और आक के फूल भी अर्पित किए जाते हैं। शिवलिंग पर तुलसी, केतकी, हल्दी और सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता। पूजा के अंत में शिव चालीसा और आरती करें; शिव स्तोत्र सनातन शास्त्र पुस्तकालय में भी मिलते हैं।
व्रत में क्या खाएँ, क्या न खाएँ
महाशिवरात्रि का व्रत फलाहार या निर्जला, दोनों तरह से रखा जाता है। फलाहार में फल, दूध, दही, मक्खन, सूखे मेवे, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीज़ें ली जा सकती हैं। खाने में सिर्फ सेंधा नमक इस्तेमाल करें।
अनाज, दाल, प्याज़-लहसुन, मांसाहार और नशा व्रत में वर्जित माना जाता है। बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और बच्चे कठोर व्रत न रखें — उनके लिए हल्का फलाहार और सादा पूजा ही पर्याप्त है। व्रत का असली नियम मन की शांति है: गुस्सा, झूठ और कठोर वाणी से भी परहेज़ करें। जो लोग नियमित व्रत रखते हैं, वे प्रदोष व्रत की तारीखों का भी ध्यान रख सकते हैं, जो हर महीने त्रयोदशी को पड़ता है।
पारण: व्रत कब और कैसे खोलें
व्रत अगले दिन, यानी 7 मार्च की सुबह स्नान और सुबह की शिव पूजा के बाद खोला जाता है। परंपरा के अनुसार पारण चतुर्दशी समाप्त होने से पहले, यानी दोपहर 1:46 बजे से पहले कर लेना चाहिए। पारण में हल्का सात्विक भोजन लें, तुरंत भारी या तीखा खाना न खाएँ। प्रसाद सबमें बाँटें और यथाशक्ति दान करें — इसी से व्रत पूरा माना जाता है।
व्रतों में संकल्प, पूजा और पारण का क्रम कैसा चलता है, इसका एक अच्छा उदाहरण करवा चौथ 2026 की व्रत विधि भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
महाशिवरात्रि 2027 कब है? शनिवार, 6 मार्च 2027 को, रात की पूजा 6-7 मार्च की रात होगी।
क्या चारों प्रहर जागना ज़रूरी है? नहीं। पूरी रात जागना उत्तम माना जाता है, पर आधी रात की निशिता काल पूजा भी पर्याप्त मानी जाती है।
व्रत कब खोलें? 7 मार्च की सुबह स्नान और पूजा के बाद, चतुर्दशी समाप्त होने (दोपहर करीब 1:46 बजे) से पहले।
