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छोटी दिवाली 2026: नरक चतुर्दशी की कथा, अभ्यंग स्नान और पूजा विधि

panditraina·October 13, 2026· 1 min read
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छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान — भोर में पीतल के लोटे से जल

सबसे पहले: तारीख का पेंच सुलझा लें

इस साल छोटी दिवाली को लेकर सबसे बड़ा कन्फ्यूज़न तारीख पर है — 7 नवंबर या 8 नवंबर? सच यह है कि दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, और वजह है चतुर्दशी तिथि का समय। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 7 नवंबर की सुबह लगभग 10:47 बजे शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह 11:27 बजे तक रहेगी (दृक पंचांग के अनुसार)। इसलिए तिथि-विधान से अभ्यंग स्नान 8 नवंबर (रविवार) की सुबह होगा — और दीये-पटाखे व काली चौदस 7 नवंबर (शनिवार) की शाम-रात को मनाए जाएँगे।

दीपावली के पाँच दिनों का पूरा कैलेंडर और लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त यहाँ देखें: दीपावली के पाँच दिनों का पूरा कैलेंडर।

नरकासुर की कथा: बुराई पर अच्छाई की जीत

नरकासुर भूमि देवी और भगवान विष्णु के वराह अवतार के पुत्र थे, लेकिन शक्ति पाकर वे अत्याचारी बन गए। उन्हें ब्रह्मा जी से वरदान मिला था कि उनकी मृत्यु केवल उनकी माता भू-देवी के हाथों ही हो सकती है — और तब श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा (जिन्हें भू-देवी का अवतार माना जाता है) ने नरकासुर का वध किया।

कथा का सबसे मार्मिक हिस्सा यह है कि नरकासुर ने हजारों कन्याओं को बंदी बना रखा था — परंपरा में इनकी संख्या लगभग 16,000 (कुछ ग्रंथों में 16,100) बताई जाती है। वध के बाद श्रीकृष्ण ने इन्हें मुक्त कराया और सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए अपनी पत्नियों के रूप में स्वीकार किया। इसलिए यह दिन अन्याय से मुक्ति का प्रतीक है।

श्रीकृष्ण से जुड़े स्तोत्र और भजन हमारी सनातन शास्त्र लाइब्रेरी में विष्णु-स्तोत्र संग्रह के अंतर्गत पढ़े जा सकते हैं।

अभ्यंग स्नान: इस दिन की सबसे खास विधि

नरक चतुर्दशी की सुबह का अभ्यंग स्नान इस पर्व की आत्मा है। “अभ्यंग” यानी शरीर पर तेल लगाना — नियम सरल है: सूर्योदय से पहले उठें, तिल का तेल और उबटन (हल्दी, बेसन, चंदन का लेप) लगाएँ, फिर चंद्रमा के उदय के बाद स्नान करें। 2026 में अभ्यंग स्नान का मुहूर्त 8 नवंबर की सुबह लगभग 5:30 से 6:45 बजे के बीच रहेगा (अपने शहर का पंचांग अवश्य देख लें — शहर के हिसाब से थोड़ा अंतर संभव है)।

स्नान के बाद नए वस्त्र पहनें, और आँखों में काजल भी लगाया जाता है — मान्यता है कि यह बुरी नज़र से रक्षा करता है। कहा जाता है कि यह स्नान नरक के भय से मुक्ति देता है, इसीलिए इस दिन को नरक निवारण चतुर्दशी भी कहते हैं। स्नान के बाद यम तर्पण भी किया जाता है — दक्षिण की ओर मुँह करके तिल मिले जल की तीन अंजलि यम देवता को अर्पित करना, ताकि परिवार पर अकाल मृत्यु और संकट न आए। यम से जुड़े मंत्र वैदिक मंत्र संग्रह में देखे जा सकते हैं।

सुबह इतनी जल्दी उठने का अभ्यास ब्रह्म मुहूर्त के समय से भी जुड़ा है — यही वह पवित्र समय है जब दिन की शुरुआत सबसे शुभ मानी जाती है।

काली चौदस, रूप चौदस, भूत चतुर्दशी: एक ही दिन के कई रंग

भारत के अलग-अलग हिस्सों में यही दिन अलग-अलग नामों से मनाया जाता है:

  • काली चौदस (गुजरात, महाराष्ट्र): 7 नवंबर की रात को माँ काली की पूजा होती है — नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए। इस रात हनुमान पूजा भी होती है; हनुमान चालीसा का पाठ इस दिन फलदायी माना जाता है।
  • रूप चौदस (राजस्थान): यहाँ यह दिन शृंगार और सौंदर्य का है — महिलाएँ उबटन लगाती हैं और सजती-सँवरती हैं।
  • भूत चतुर्दशी (बंगाल): पूर्वी भारत में इस दिन पितरों और बुरी आत्माओं से रक्षा के लिए दीये जलाए जाते हैं।

ध्यान रहे — काली चौदस और नरक चतुर्दशी एक ही दिन पड़ते हैं, लेकिन पूजा-विधान अलग हैं। एक में शक्ति की उपासना है, दूसरे में शुद्धि और स्नान का विधान।

शाम को: दीये, पटाखे और बड़ी दिवाली की तैयारी

7 नवंबर की शाम से ही घरों में दीये जलने लगते हैं — छोटी दिवाली बड़ी दिवाली की रिहर्सल जैसी है। फिर 8 नवंबर की शाम को मुख्य दीपावली — लक्ष्मी-गणेश पूजा होती है। इससे एक दिन पहले धनतेरस 2026 की पूजा विधि और मुहूर्त भी देख लें, ताकि पाँचों दिनों की तैयारी एक साथ हो जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छोटी दिवाली 2026 में 7 नवंबर को मनाएँ या 8 को?
तिथि के हिसाब से अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह है, लेकिन दीये-पटाखे और काली चौदस 7 नवंबर की शाम-रात को। ज़्यादातर परिवार 7 की शाम को छोटी दिवाली मनाते हैं और 8 की सुबह स्नान करते हैं।

अभ्यंग स्नान के लिए उबटन कैसे बनाएँ?
बेसन, हल्दी, थोड़ा चंदन पाउडर और तिल का तेल मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएँ। पूरे शरीर पर लगाकर कुछ देर रखें, फिर स्नान करें।

क्या यम तर्पण सभी कर सकते हैं?
हाँ। शास्त्रीय मत से पिता के जीवित रहते भी यह तर्पण किया जाता है — दक्षिण की ओर मुँह करके तिल मिले जल की तीन अंजलि यम देवता के नाम पर अर्पित करें।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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