FESTIVALS & VRATS

तुलसी विवाह 2026: तारीख, पूजा विधि और महत्व

panditraina·October 15, 2026· 1 min read
Stop guessing about your stars.Get your free Kundli with personalised predictions.

Create Free Kundli

Tulsi Vivah 2026

हर साल कार्तिक महीने में एक दिन ऐसा आता है जब घर-आंगन में असली शादी जैसा माहौल होता है — मंडप सजता है, दुल्हन को लाल जोड़ा पहनाया जाता है और मंत्रों के साथ फेरे होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि दुल्हन होती है तुलसी जी और दूल्हा होता है भगवान विष्णु का शालिग्राम स्वरूप। यही है तुलसी विवाह — सदियों पुरानी परंपरा जो हर कार्तिक को खास बना देती है।

तुलसी विवाह 2026: तारीख और शुभ समय

साल 2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि है, जो सुबह 6:31 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। अधिकांश परंपराओं में तुलसी विवाह द्वादशी के दिन ही रचाना श्रेष्ठ माना गया है, और विवाह संस्कार शाम को प्रदोष काल में किया जाता है — वही समय जब पारंपरिक हिंदू विवाहों के पवित्र संस्कार शुरू होते हैं।

एक बात जान लीजिए: कुछ परिवार एकादशी की शाम (इस साल शुक्रवार, 20 नवंबर) से ही तुलसी विवाह मनाना शुरू कर देते हैं, और नेपाल में इसे प्रबोधिनी एकादशी के दिन ही मनाया जाता है। आपके घर की जो परंपरा है, वही सही है — तिथि से ज्यादा महत्व श्रद्धा का है। सारी द्वादशी तिथियों की सूची यहां देख सकते हैं।

तुलसी विवाह की कथा: वृंदा और जलंधर

तुलसी विवाह की कथा पद्म पुराण में मिलती है। कथा के अनुसार तुलसी जी अपने पूर्व जन्म में वृंदा थीं — असुर राजा जलंधर की पत्नी और भगवान विष्णु की परम भक्त। वृंदा की पवित्रता के कारण जलंधर अजेय हो गया था — उसे कोई हरा नहीं पा रहा था, शिव जी भी नहीं।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धरकर वृंदा के पतिव्रत को भंग किया। उसी क्षण जलंधर की शक्ति छूट गई और शिव जी ने युद्ध में उसका वध कर दिया। सच्चाई जानकर वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि वे काले पत्थर (शालिग्राम) बन जाएं, और पति की चिता के साथ सती हो गईं।

भगवान विष्णु ने वृंदा को आशीर्वाद दिया कि उनकी भस्म से तुलसी का पौधा उत्पन्न होगा और हर वर्ष शालिग्राम रूप में वे तुलसी से विवाह करेंगे। तभी से कार्तिक मास में तुलसी विवाह की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी है, और तुलसी जी को साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है।

घर में तुलसी विवाह की सरल पूजा विधि

तुलसी विवाह किसी बड़े आयोजन की मांग नहीं करता — छोटे से आंगन या बालकनी में भी यह विधि पूरी हो जाती है:

  • तैयारी: तुलसी के गमले या चौरे को मंडप जैसा सजाएं। तुलसी को लाल चुनरी पहनाएं और गहनों से श्रृंगार करें — बिल्कुल दुल्हन की तरह।
  • शालिग्राम स्थापना: तुलसी के बगल में शालिग्राम शिला (या विष्णु/कृष्ण की मूर्ति) रखें और धोती पहनाकर दूल्हे की तरह सजाएं।
  • हल्दी और मालाएं: दोनों को हल्दी लगाएं, फूलों की मालाएं पहनाएं और पवित्र सूत (कलावा) से दोनों को जोड़ें — जैसे वर-वधू को जोड़ा जाता है।
  • विवाह संस्कार: संकल्प लें, वैवाहिक मंत्रों का उच्चारण करें, चावल-कुमकुम छिड़कें और तुलसी जी का कन्यादान करें। कन्यादान की भावना ही इस संस्कार का सार है।
  • आरती और भोग: विष्णु और तुलसी की आरती करें (हमारे आरती संग्रह में मिलेगी), प्रसाद चढ़ाएं और वैदिक मंत्रों का जप करें।

ज्यादातर घरों में यह पूजा महिलाएं ही करती हैं, और विवाह के बाद पारंपरिक भोजन होता है — ठीक असली शादी जैसा माहौल!

तुलसी विवाह का महत्व

तुलसी विवाह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, हिंदू कैलेंडर का एक मोड़ है। इस विवाह के साथ चातुर्मास से रुका विवाह-मुहूर्त काल खुल जाता है — शादियां, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं; तुलसी विवाह उसी जागरण का उत्सव है।

मान्यता है कि जिन दंपतियों को कन्या सुख नहीं मिला, वे तुलसी विवाह में तुलसी जी का कन्यादान करके कन्यादान के समान पुण्य पा सकते हैं। विवाहित महिलाएं पति और परिवार की कुशलता के लिए, और कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। विवाह की योजना बना रहे हैं तो शुभ विवाह तिथियां और कुंडली मिलान जरूर देख लें।

तुलसी-विष्णु की यह कथा हमारे सनातन शास्त्र लाइब्रेरी में पद्म पुराण और विष्णु सहस्रनाम जैसे ग्रंथों में पढ़ी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तुलसी विवाह 2026 में कब है?
शनिवार, 21 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल द्वादशी)। विवाह संस्कार शाम को प्रदोष काल में किया जाता है।

क्या तुलसी विवाह एकादशी को भी मनाया जाता है?
हां, कुछ परंपराओं में एकादशी (20 नवंबर, देवउठनी एकादशी) की शाम से ही विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं, और नेपाल में मुख्य उत्सव एकादशी को ही होता है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

तुलसी विवाह से क्या लाभ मिलता है?
मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और कन्यादान के समान पुण्य मिलता है। यही वह दिन है जब विवाह का शुभ मुहूर्त काल फिर खुलता है।

इस कार्तिक में तुलसी जी की दुल्हन-श्रृंगार के साक्षी जरूर बनिए — शुभ तुलसी विवाह!

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

Kundli MatchingDosha AnalysisTransitsMuhurta
GET YOUR FREE KUNDLI
Curious about your own chart?

Generate your free Kundli in 30 seconds and explore personalised predictions.

Create Free Kundli →