फरवरी — शादी-विवाह का महीना। जनवरी के खरमास-विराम (1 से 14 जनवरी) के बाद 15 जनवरी से शादी का सीजन फिर खुल चुका है, और फरवरी उसका सबसे व्यस्त महीना होता है। मौसम खुशनुमा रहता है, बारात के लिए न ज़्यादा सर्दी, न गर्मी — और पंचांग में लगभग पूरा महीना शुभ तारीखों से भरा है। अगर आपके घर में फरवरी 2027 में शादी की तैयारी चल रही है, तो नीचे की सूची काम की है — 13 शुभ तारीखें, वार, नक्षत्र और तिथि के साथ।
फरवरी 2027 की शुभ विवाह तारीखें — पूरी सूची
ये तारीखें दो स्वतंत्र पंचांग स्रोतों (drikpanchang-आधारित) में एक जैसी नक्षत्र-तिथि के साथ सूचीबद्ध हैं। ध्यान रखें — मुहूर्त का सटीक समय आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए घंटे-मिनट की घड़ी नीचे नहीं दी गई; वह अपने शहर के पंचांग से निकालें।
- 2 फरवरी (मंगलवार) — मूल नक्षत्र, द्वादशी तिथि
- 3 फरवरी (बुधवार) — मूल नक्षत्र, द्वादशी तिथि
- 9 फरवरी (मंगलवार) — उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, चतुर्थी तिथि
- 10 फरवरी (बुधवार) — उत्तर भाद्रपद/रेवती नक्षत्र, चतुर्थी/पंचमी तिथि
- 11 फरवरी (गुरुवार) — रेवती नक्षत्र, पंचमी तिथि
- 14 फरवरी (रविवार) — रोहिणी नक्षत्र, नवमी तिथि
- 15 फरवरी (सोमवार) — रोहिणी नक्षत्र, नवमी तिथि
- 21 फरवरी (रविवार) — मघा नक्षत्र, प्रतिपदा तिथि
- 22 फरवरी (सोमवार) — उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र, द्वितीया/तृतीया तिथि
- 25 फरवरी (गुरुवार) — स्वाति नक्षत्र, पंचमी/षष्ठी तिथि
- 26 फरवरी (शुक्रवार) — स्वाति नक्षत्र, षष्ठी तिथि
- 27 फरवरी (शनिवार) — अनुराधा नक्षत्र, अष्टमी तिथि
- 28 फरवरी (रविवार) — अनुराधा नक्षत्र, अष्टमी तिथि
कौन-सी तारीखें सबसे ज़्यादा मांग में रहेंगी
छुट्टी वाले दिन हमेशा पहले बुक होते हैं — 14, 21 और 28 फरवरी (रविवार) तथा 15 और 22 फरवरी (सोमवार) पर सबसे ज़्यादा मांग रहेगी। इनमें भी 14-15 फरवरी की तारीखें खास हैं, क्योंकि रोहिणी नक्षत्र विवाह के लिए पारंपरिक रूप से प्रिय माना जाता है। 22 फरवरी को उत्तर फाल्गुनी है — यह भी विवाह का उत्तम नक्षत्र है।
एक ईमानदार बात भी कह दें। 2-3 फरवरी को मूल नक्षत्र है और 21 फरवरी को मघा — परंपरा में इन दोनों नक्षत्रों के प्रथम चरण को कुछ पंडित विवाह के लिए टालते हैं, जबकि कई पंचांग इन्हीं तारीखों को शुभ सूची में रखते हैं। इसी तरह 14-15 फरवरी को नवमी तिथि है, जिसे रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) में गिना जाता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के हिसाब से पंडित से एक बार ज़रूर पूछ लें — परंपरा और सूची, दोनों का सम्मान ज़रूरी है।
शुभ मुहूर्त तय कैसे होता है
पंडित तारीख ऐसे ही नहीं उठा लेते — दीपावली की लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त की तरह हर शुभ काम का समय पंचांग के पांच अंगों से निकलता है। विवाह के लिए सोम, बुध, गुरु और शुक्रवार उत्तम माने जाते हैं, जबकि मंगलवार को कई परंपराओं में टाला जाता है — हालांकि 2 और 9 फरवरी (दोनों मंगलवार) कई पंचांगों में सूचीबद्ध हैं, इसलिए अपने परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।
तिथियों में शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी शुभ मानी जाती हैं। एक अच्छी खबर यह है कि फरवरी 2027 में कोई खरमास नहीं है — शादी का सीजन 14 मार्च तक खुला रहेगा, उसके बाद खरमास आरंभ होगा। और हां, फेरों का समय तय करते समय राहुकाल से बचना न भूलें; दिन के शुभ खंड चुनने के लिए चौघड़िया काम आएगी।
आखिरी सलाह — तारीख से ज़्यादा ज़रूरी बातें
सबसे पहले — तारीख तय करने से पहले दोनों की कुंडली मिलान ज़रूर करा लें। 36 गुणों का मिलान तारीख से ज़्यादा मायने रखता है, और मांगलिक दोष जैसी बातें भी मिलान में ही साफ होती हैं। पूरे साल की तारीखों की योजना के लिए हमारा विवाह मुहूर्त गाइड भी देख सकते हैं।
दूसरी बात — अलग-अलग पंचांगों में एक-दो तारीखों का अंतर मिल सकता है। कुछ स्रोतों में 16 या 17 फरवरी भी शुभ सूची में दिखती है, जबकि मुख्य सूची में नहीं। यह क्षेत्रीय पंचांगों का स्वाभाविक अंतर है, कोई गलती नहीं — इसलिए अपने शहर के पंचांग और पारिवारिक पंडित से आखिरी मुहूर्त ज़रूर निकलवाएं। और अगर शादी के गहने खरीदने की परंपरा निभानी है, तो धनतेरस पर शुभ खरीदारी की परंपरा के हिसाब से 6 नवंबर को ही तैयारी कर लेना समझदारी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या फरवरी 2027 में खरमास है?
नहीं। खरमास 14 मार्च 2027 के बाद से शुरू होता है, इसलिए पूरा फरवरी महीना विवाह के लिए खुला है।
मुहूर्त का सटीक समय क्यों नहीं बताया गया?
क्योंकि मुहूर्त का घंटे-मिनट वाला समय आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है — दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में यह अलग-अलग होगा। तारीख, वार, नक्षत्र और तिथि पूरे भारत में एक जैसी हैं; समय अपने शहर के पंचांग से निकालें।
क्या ये सभी तारीखें हर जोड़े के लिए शुभ हैं?
नहीं। सूची सामान्य पंचांग-आधारित है। आपकी कुंडली, चंद्र राशि और परिवार की परंपरा के हिसाब से पंडित ही आखिरी मुहूर्त तय करेगा — कुंडली मिलान के बिना तारीख पक्की न करें।
