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शुभ विवाह मुहूर्त मार्च 2027: तारीखों की पूरी सूची

panditraina·October 26, 2026· 1 min read
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शुभ विवाह मंडप, मार्च 2027 विवाह मुहूर्त

मार्च 2027 की 7 शुभ तिथियाँ

मार्च 2027 में शादी की योजना बना रहे परिवारों के लिए महीने के पहले पखवाड़े में ही सात शुभ विवाह मुहूर्त मिल रहे हैं। इसके बाद लंबा विराम आता है, इसलिए तारीख के साथ वेन्यू और पंडित की उपलब्धता भी साथ-साथ देख लेनी चाहिए। नीचे दी गई सूची दिल्ली के सूर्योदय के हिसाब से है — आपके शहर में समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

  • सोमवार, 1 मार्च 2027 — मूल नक्षत्र: रात 11:12 बजे से 2 मार्च सुबह 6:57 बजे तक। तिथि नवमी/दशमी।
  • मंगलवार, 2 मार्च 2027 — मूल नक्षत्र: सुबह 6:57 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक। तिथि दशमी।
  • बुधवार, 3 मार्च 2027 — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: रात 1:06 बजे से 4 मार्च सुबह 6:56 बजे तक। तिथि एकादशी।
  • गुरुवार, 4 मार्च 2027 — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र: सुबह 6:56 बजे से 5 मार्च रात 1:35 बजे तक। तिथि एकादशी/द्वादशी।
  • मंगलवार, 9 मार्च 2027 — उत्तर भाद्रपद नक्षत्र: सुबह 9:58 बजे से 10 मार्च सुबह 6:51 बजे तक। तिथि प्रतिपदा/द्वितीया।
  • बुधवार, 10 मार्च 2027 — उत्तर भाद्रपद, रेवती नक्षत्र: सुबह 6:51 बजे से 11 मार्च सुबह 5:13 बजे तक। तिथि द्वितीया/तृतीया।
  • रविवार, 14 मार्च 2027 — रोहिणी नक्षत्र: शाम 5:10 बजे से 15 मार्च सुबह 6:47 बजे तक। तिथि सप्तमी।

इन सातों तिथियों पर मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, रेवती और रोहिणी जैसे विवाह के लिए शुभ माने जाने वाले नक्षत्र पड़ रहे हैं। यही वजह है कि अलग-अलग पंचांग सूचियाँ इन्हीं तारीखों पर एकमत दिखती हैं। फरवरी 2027 की विवाह मुहूर्त सूची से तुलना करें तो साफ दिखता है कि मार्च की सूची छोटी है — इसलिए जल्दी फैसला करना समझदारी होगी।

14 मार्च के बाद विराम क्यों आता है

14 मार्च के बाद अगला शुभ विवाह मुहूर्त सीधे 18 अप्रैल 2027 को मिलता है। बीच का यह समय खरमास का माना जाता है, जिसमें विवाह जैसे मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। इसका मतलब यह नहीं कि इस दौरान कोई रस्म ही नहीं हो सकती — सगाई, तारीख पक्की करना, वेन्यू और कपड़ों की तैयारी जैसे काम चलते रहते हैं। बस फेरों के लिए शुभ लग्न की प्रतीक्षा की जाती है।

जो परिवार मार्च की तारीख नहीं ले पाए, उनके लिए 18 से 28 अप्रैल के बीच की सूची अगला मौका है — वहाँ भी वीकेंड की तारीखें सबसे पहले भरती हैं।

तारीख पक्की करने से पहले 5 ज़रूरी जाँच

सूची देखकर सीधे तारीख पक्की कर देना आम गलती है। पहली जाँच है कुंडली मिलान — 36 गुणों में से 18 या उससे अधिक का मिलान आमतौर पर ठीक माना जाता है, पर सिर्फ अंकों पर फैसला नहीं करना चाहिए। गुणों के साथ-साथ दोनों की कुंडलियों का पूरा अध्ययन पंडित से करवाना बेहतर रहता है।

दूसरी जाँच मंगल दोष की है। हमारे यहाँ मंगल दोष सिर्फ लग्न से 1, 4, 7, 8 और 12वें भाव में मंगल होने पर माना जाता है — दूसरे या दसवें भाव का मंगल इस दोष में नहीं गिना जाता। मंगल दोष कैलकुलेटर से शुरुआती जाँच हो जाती है, पर अंतिम फैसला पंडित की सलाह से ही लें।

तीसरी जाँच है लग्न का समय — ऊपर दिए गए मुहूर्त दिन के शुभ समय हैं, पर फेरों का असली लग्न वर-वधू की कुंडली और शहर के सूर्योदय से निकलता है। चौथी जाँच राहुकाल से बचना है। पाँचवीं और सबसे व्यावहारिक जाँच वेन्यू, हलवाई और पंडित की उपलब्धता है — ये तीनों मिल जाएँ, तभी तारीख सच में पक्की मानी जाती है।

विवाह की शुभ तारीखों के लिए शुभ विवाह तारीखों का पंचांग पृष्ठ भी देख सकते हैं। विवाह के बाद करवा चौथ जैसे व्रतों की विधि के लिए करवा चौथ की व्रत विधि और मंत्रों के लिए सनातन शास्त्र ग्रंथालय काम आएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मार्च 2027 में सिर्फ यही 7 तारीखें शुभ हैं?
प्रमुख पंचांग सूचियों के हिसाब से हाँ, यही सात मुख्य तारीखें हैं। समय कुछ मिनट अलग हो सकता है, इसलिए अंतिम लग्न पंडित से ही निकलवाएँ।

मंगलवार की तारीखें (2 और 9 मार्च) लेनी चाहिए?
सिर्फ वार देखकर तारीख खारिज नहीं की जाती — तिथि, नक्षत्र और लग्न का पूरा योग देखा जाता है, और इन दोनों दिन वह योग शुभ बन रहा है। फिर भी शंका हो तो पंडित से पूछ लेना ठीक रहेगा।

14 मार्च के बाद शादी कब कर सकते हैं?
अगला शुभ विवाह मुहूर्त 18 अप्रैल 2027 से शुरू होता है। बीच के समय में सगाई और तैयारियाँ की जा सकती हैं, फेरों के लिए शुभ लग्न की प्रतीक्षा की जाती है।

आखिर में एक सीधी सी बात — मुहूर्त तारीख चुनने में मदद करता है, पर शादी की असली तैयारी दो परिवारों की समझदारी से होती है। तारीख चाहे 1 मार्च हो या 14 मार्च, पंडित से लग्न निकलवाकर और सबकी सहमति से फैसला लेना ही सबसे शुभ तरीका है।

✦ From the Shrimad Astro desk
Team Shrimad Astro
Vedic Astrology Writers & Researchers

Every article is researched from classical Jyotish texts and reviewed for accuracy before publishing — no fear-mongering, no shortcuts.

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