दीपावली 2026: 5 दिनों का त्योहार, एक कैलेंडर
दीपावली कोई एक दिन का त्योहार नहीं है — यह पूरे पाँच दिन का उत्सव है, जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होता है। हर दिन की अपनी कथा है, अपनी पूजा है और अपना मतलब। इस साल की खास बात यह है कि दीपावली रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है, तो घर की सफाई और बाजार के काम का प्लान अभी से बना लीजिए। नीचे पहले पाँचों दिनों का कैलेंडर, फिर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त और घर पर करने की सरल विधि।
5 दिनों का कैलेंडर: 6 से 11 नवंबर 2026
- 6 नवंबर (शुक्रवार) — धनतेरस: धन्वंतरि जयंती और शुभ खरीदारी का दिन। शाम को यम दीपदान की परंपरा। धनतेरस पूजा मुहूर्त और विधि यहाँ विस्तार से पढ़ें।
- 7 नवंबर (शनिवार) — छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी: कृष्ण द्वारा नरकासुर वध की स्मृति में अभ्यंग स्नान और दीप जलाने की परंपरा। छोटी दिवाली की कथा और विधि।
- 8 नवंबर (रविवार) — दीपावली: मुख्य दिन। कार्तिक अमावस्या की रात लक्ष्मी-गणेश पूजा, घर-घर दीप, पटाखे और मिठाइयाँ। दीपावली कैलेंडर और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में अपने शहर का सटीक समय देखें।
- गोवर्धन पूजा / अन्नकूट — 9–10 नवंबर: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर ~12:31 से 10 नवंबर दोपहर ~2 बजे तक। शाम का अन्नकूट 9 नवंबर (drikpanchang); प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर सुबह 6:40–8:50 (दिल्ली पंचांग) — अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मनाएं।
- 11 नवंबर (बुधवार) — भाई दूज: भाई-बहन के स्नेह का पर्व, दोपहर में तिलक की परंपरा।
लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: प्रदोष काल और वृषभ लग्न का संयोग
लक्ष्मी पूजा अमावस्या की रात प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के पहले प्रहर) में होती है। सबसे शुभ वह समय माना जाता है जब प्रदोष काल के साथ वृषभ (Taurus) लग्न भी चल रहा हो — मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी घर में टिकती हैं। दिल्ली के लिए 2026 में यह संयोग शाम 5:54 से रात 7:50 तक है (प्रदोष काल: 5:31–8:09) — करीब दो घंटे का शुभ समय।
एक व्यावहारिक बात: मुहूर्त हर शहर में 10-20 मिनट आगे-पीछे होता है, इसलिए दिल्ली का समय सीधे न अपनाएँ। पूजा शुरू करने से पहले दीपावली कैलेंडर में अपने शहर का सटीक मुहूर्त जरूर देख लें।
घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की सरल विधि
पूजा को भारी-भरकम बनाने की जरूरत नहीं — शांत मन और सही क्रम ही असली विधि है। पूजा स्थान को पहले गंगाजल या साफ पानी से पोंछकर रंगोली बनाएँ।
- संकल्प और कलश: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। साथ में कलश रखें — मान्यता है कि कलश में सभी देवताओं का वास होता है।
- पंचोपचार पूजन: गणेश जी की पूजा पहले करें (विघ्नहर्ता का अधिकार पहले है), फिर लक्ष्मी जी का षोडशोपचार या पंचोपचार पूजन — धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य और आरती।
- धन और बही-खाते की पूजा: दीपावली की रात नए बही-खाते, तिजोरी और व्यापारिक सामान की पूजा की पुरानी परंपरा है। सोने-चाँदी के सिक्के या जेवर भी चौकी पर रखकर पूजें।
- मंत्र जाप: पूजा के बाद लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें। वैदिक मंत्र संग्रह में लक्ष्मी के स्तोत्र और मंत्र मिल जाएँगे — सनातन शास्त्र लाइब्रेरी में कनकधारा स्तोत्रम और महालक्ष्मी अष्टकम भी उपलब्ध हैं।
- आरती और प्रसाद: लक्ष्मी जी की आरती के साथ पूजा संपन्न करें और प्रसाद बाँटें।
दिवाली की रात में होने वाली 3 आम गलतियाँ
पहली: मुहूर्त बीत जाने के बाद पूजा शुरू करना। प्रदोष काल का समय पहले से नोट कर लें और तैयारी दोपहर तक पूरी रखें। दूसरी: पूजा के बीच में बार-बार उठना — फोन साइलेंट करके बैठें। तीसरी: पटाखों के शोर में पूजा की शांति खो देना — आतिशबाजी पूजा के बाद कीजिए, और इस बार पड़ोसियों व पालतू जानवरों का भी ख्याल रखिएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दीपावली 2026 कब है?
रविवार, 8 नवंबर 2026 — कार्तिक मास की अमावस्या। इसी रात लक्ष्मी-गणेश पूजा होती है।
लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अमावस्या की रात प्रदोष काल में, जब वृषभ लग्न चल रहा हो। सटीक समय शहर के हिसाब से बदलता है — स्थानीय पंचांग देखें।
गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को है या 10 को?
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट — 9–10 नवंबर: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर ~12:31 से 10 नवंबर दोपहर ~2 बजे तक। शाम का अन्नकूट 9 नवंबर (drikpanchang); प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर सुबह 6:40–8:50 (दिल्ली पंचांग) — अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मनाएं।
